DEFENCE

स्पेशल रिपोर्ट: चीन के साथ 7वें दौर की वार्ता भी बेनतीजा

चीन के विदेश मंत्री वांग ई
फाइल फोटो

नई दिल्ली। पूर्वी लद्दाख के सीमांत इलाकों में गत पांच मई से चल रही सैन्य तनातनी को दूर करने के लिये 12 अक्टूबर को हुई सातवें दौर की सैन्य कमांडरों की वार्ता भी बेनतीजा रही। सातवें दौर की वार्ता के साथ ही चीन ने सीमा मसले को लेकर नया सवाल खड़ा कर दिया है।





चीन ने कहा है कि भारत सैन्य इरादे से ढांचागत निर्माण कर रहा है जिसकी वजह से विवाद पैदा हुआ है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने यह टिप्पणी भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा 44 पुलों के उद्घाटन पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए की है। चीन ने कहा है कि भारत और चीन के बीच सीमा विवाद की जड़ यही वजह है।

सातवें दौर की वार्ता के बाद चीन की ओर से जारी साझा बयान में पुरानी बातें दुहराई गई हैं और इसमें नया कुछ भी नहीं है। इस बयान के मुताबिक दोनों पक्षों ने इस वार्ता को उपयोगी और सकारात्मक माना है। बयान के मुताबिक दोनों पक्षों ने गम्भीरता से और गहराई से विचारों का आदान प्रदान किया जिससे पश्चिमी सेक्टर में वास्तविक नियंत्रण रेखा एक दूसरे के विचारों की बेहतर समझ बनी। दोनों पक्षों ने माना कि यह बैठक रचनात्मक थी और दोनों सहमत हुए कि दोनों देशों के नेताओं के बीच बनी महत्वपूर्ण सहमति को जल्द लागू करेंगे और मतभेदों को झगडों में नहीं बदलेंगे। इसके साथ ही दोनों पक्ष मिल कर सीमांत इलाकों में शांति व स्थिरता को सुनिश्चित करेंगे। दोनों पक्ष सहमत हुए कि सैनिक और राजनयिक माध्यमों से वार्ता और संवाद बनाए रखेंगे और जितना जल्द हो सके एक जायज , उचित और परस्पर स्वीकार्य समाधान पर पहुंच सकेंगे।

इसके साथ ही अलग बयान में चीनी पक्ष ने यह भी कहा है कि चीन लद्दाख केन्द्र शासित प्रदेश को मान्यता नहीं देता है जो भारत द्वारा गैरकानूनी तरीके से स्थापित किया गया है। चीन अरुणाचल प्रदेश को भी मान्यता नहीं देता है । सीमांत इलाकों में सैन्य इरादे से ढांचागत निर्माण का चीन विरोध करता है। दोनों पक्षों के बीच हुई सहमति के आधार पर कोई भी पक्ष हालात भडकाने वाले कदम नहीं उठाए। इससे हालात शांत करने के प्रयासों पर चोट आएगी। पिछले कुछ वक्त से भारतीय पक्ष सीमांत इलाकों में ढांचागत विकास किया है और सैनिक तैनाती को बढा रहा है। दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव की जड में यही बात है। चीनी बयान के मुताबिक चीन भारत से यह मांग करता है कि दोनों देशों के बीच बनी सहमति को गम्भीरता से लागू करे और शांति व स्थिरता को बढावा देने के लिये ठोस कदम उठाए।

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