DEFENCE

स्पेशल रिपोर्ट: तीसरी पीढ़ी की टैंक नाशक मिसाइल ‘नाग’ सेना को सौंपने के लिए तैयार

नाग एंटी टैंक मिसाइल

नई दिल्ली। तीसरी पीढ़ी की टैंक नाशक मिसाइल नाग का अंतिम परीक्षण सफल रहा है। गुरुवार को राजस्थान के पोकऱण रेंज से इस एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल (ATGM) के परीक्षण का अंतिम दौर सफल रहा। गौरतलब है कि इस टैंक नाशक मिसाइल का विकास पिछले दो दशकों से किया जा रहा है।





नाग के ताजा परीक्षण के बाद इसे थलसेना के इस्तेमाल के लिये घोषित कर दिया गया है और इसका उत्पादन जल्द शुरु होगा। इस मिसाइल का उत्पादन सार्वजनिक क्षेत्र के रक्षा उपक्रम भारत डाइनामिक्स (BDL) द्वारा किया जाएगा जब कि मिसाइल का नामिका वाहक आर्डनेंस फैक्टरी बोर्ड की मेडक इकाई द्वारा किया जाएगा। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस मिसाइल के सफल परीक्षण के लिये डीआरडीओ और थलसेना को बधाई दी है।

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा इस मिसाइल का विकास किया गया है। इस मिसाइल का परीक्षण इसमें असली वारहेड लगा कर किया गया। इस मिसाइल से कुछ दूरी पर रखे एक टैंक को निशाना बनाया गया। इस मिसाइल को नाग के लिये बने मिसाइल कैरियर नामिका से छोडा गया। नाग मिसाइल ने लक्ष्य पर सटीक निशाना लगाते हुए टैंक के कवच को ध्वस्त कर दिया। यह मिसाइल दुश्मन के टैंक को रात या दिन किसी भी वक्त निशाना बना सकती है। इस मिसाइल में दागो और भुल जाओ वाली टाप अटैक क्षमता है। इसमें पैसिव होमिंग गाइडेंस प्रणाली लगी है जिससे किसी भी कम्पोजिट और रिएक्टिव कवच से लैस मुख्य युद्धक टैंक को ध्वस्त किया जा सकता है।

नाग मिसाइल का कैरियर बीएमपी-2 आधारित प्रणाली की तरह है। यह जल, थल दोनों में सचल हो सकता है।

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