DEFENCE

अमेरिकी पाबंदियों से भारत-रूस रक्षा व्यापार पर असर नहीं

मोदी-पुतिन

नई दिल्ली। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने गुरुवार को राज्यसभा में कहा कि हमारे रूस के साथ भी अच्छे संबंध हैं और अमेरिका के साथ भी। यह बात काफी हद तक ठीक है, पर यह भी सच है कि रक्षा सहयोग के मामलों में भारत का झुकाव पिछले कुछ वर्षों में अमेरिका की तरफ बढ़ा है। इसकी वजह यह भी है कि भारत अपने तकनीकी आधार को किसी एक देश पर केंद्रित नहीं करना चाहता। दूसरा कारण है बेहतर तकनीक की जरूरत और तीसरा कारण है बदलती वैश्विक भू-राजनीति।





भारत और रूस के सामरिक रिश्तों में एक बदलाव अमेरिका और रूस के रिश्तों में आते बदलाव के कारण भी है। रूस और यूक्रेन के टकराव के कारण अमेरिका और रूस के रिश्तों में काफी कड़वाहट आ गई है। हाल में अमेरिका ने रूस पर कुछ पाबंदियाँ लगाईं हैं, जिनका असर भारत और रूस के रिश्तों पर पड़ेगा या नहीं यह देखने की जरूरत अब होगी। क्या इन पाबंदियों के कारण रूसी रक्षा सामग्री खरीदने में हमें दिक्कत तो नहीं होगी?

एक अंग्रेजी अखबार की खबर के अनुसार, अमेरिका चाहता है कि भारत अपनी रक्षा सामग्री उससे खरीदे। इस वक्त भारत और रूस के बीच करीब 15 अरब डॉलर की रक्षा सामग्री की खरीद पाइपलाइन में है। इसमें एयर डिफेंस सिस्टम, स्टैल्थ फाइटर विमान, हल्के हेलिकॉप्टर और लड़ाकू विमान के सौदे शामिल हैं। जहाँ तक ऊर्जा-कारोबार का सवाल है भारत रूसी सखालिन तेलक्षेत्र से जुड़े कंसोर्शियम का साझीदार है, जिसमें अमेरिका की बड़ी तेल कंपनी एक्ज़ॉनमोबिल भी भागीदार है। पिछले महीने अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने एक्ज़ॉनमोबिल पर 20 लाख डॉलर का जुर्माना इस कारण से लगाया था कि उसने सन 2014 में ओबामा प्रशासन द्वारा रूस पर लगाई पाबंदियों का उल्लंघन किया था। बहरहाल विशेषज्ञों का कहना है कि भारत के सामने अभी ऐसे खतरे नहीं हैं।

इस सिलसिले में इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन के पूर्व अध्यक्ष आरएस बुटोला का कहना है कि अमेरिकी पाबंदियाँ नए बिजनेस पर हैं, जो पहले से चला आ रहा है उसपर नहीं। इसके अलावा भारत केवल संयुक्त राष्ट्र की पाबंदियों का मानता है।

Comments

Most Popular

To Top