DEFENCE

डोकलाम: ड्रैगन के खिलाफ भारत को मिली बड़ी कामयाबी

पीएम मोदी और जापान के प्रधानमंत्री शिंजो अबे

नई दिल्ली। डोकलाम विवाद के मद्देनजर जापान खुलकर चीन के खिलाफ भारत और भूटान के साथ खड़ा है। मीडिया खबरों के मुताबिक भारत में जापान के राजदूत केनजी हिरामात्सु ने भारतीय राजनयिकों को अपने देश का अधिकारिक रुख साफ कर दिया है। इस विवाद में पहली बार किसी देश ने भारत का पक्ष लिया है। जापान के प्रधानमंत्री शिंजो अबे 13 से 15 सितंबर तक भारत के दौरे पर आने वाले हैं।





हिरामत्सु भारत के साथ ही भूटान के भी राजदूत हैं। वो भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग तोबगे से अगस्त के पहले हफ्ते में मिले थे और अपने देश के समर्थन के बारे में बताया था। जापानी राजनयिक जून आखिर से ही इस मुद्दे पर भारतीय राजनयिकों से नियमित संपर्क में हैं। भारत और भूटान जारी डोकलाम विवाद पर जापान को अपना पक्ष बताते रहे हैं। भारतीय विदेश मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक जापान उन प्रमुख देशों में है जिन्हें आधिकारिक स्तर पर डोकलाम की मौजूदा हालात से आधिकारिक तौर पर अवगत कराया गया है।

जापान का मानना है कि इस विवाद के कारण पूरे क्षेत्र की स्थिरता पर असर पड़ सकता है। जापान का भी चीन के साथ पुराना सीमा विवाद है। जापान के अनुसार विवाद में शामिल किसी भी पक्ष को ताकत के बल पर यथास्थिति बदलने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। चीन द्वारा यथास्थिति में बदलाव की कोशिशों पर जापान का पहले भी यही रुख रहा है। 30 जून को भारत ने चीन पर डोकलाम क्षेत्र में यथास्थिति बदलने का आरोप लगाया था

साल 2012 से 2014 के बीच चीन और जापान के बीच सेनकाकू और दियायू द्वीपों की वजह से काफी मतभेद हुए थे। जापान ने ये भी स्पष्ट किया है कि डोकलाम विवाद मूलत: चीन और भूटान के बीच का विवाद है और दोनों देश इसे स्वीकार करते हैं। डोकलाम में भारत की ‘मौजूदगी’ पर जापान का कहना है कि चीन और भारत के बीच हुए समझौते के तहत ही है। पूरे मामले में भारत के बातचीत से हल निकालने के भारत के रुख को लेकर भी जापान सकारात्मक है।

Comments

Most Popular

To Top