DEFENCE

कमांडर्स कॉन्फ्रेंस में तीनों सेनाओं के लिए ये होगा अहम मुद्दा !

रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण

नई दिल्ली। भारतीय सेना की कमांडर्स कॉन्फ्रेंस राजधानी दिल्ली में शुरू हो चुकी है जो 15 अक्टूबर तक चलेगी। कमांडर्स कॉन्फ्रेंस को रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण मंगलवार को संबोधित करेंगी। जानकारों के मुताबिक सेना इस कॉन्फ्रेंस में ज्वाइंटनेस का मुद्दा भी उठाएगी। सेना का मानना है कि तीनों सेनाओं में ज्वाइंटनेस के मसले पर कई अध्ययन किए गए थे पर सोच के अनुरूप परिणाम नहीं हासिल हो सके। इसकी वजह यह है कि तीनों सेनाओं के उम्मीदों, जरूरतों और माहौल में फर्क है। इस मुद्दे पर इनपुट, डेटा और डॉक्युमेंट समय पर सामने नहीं आ पा रहे हैं, जिससे देरी हो रही है।





कॉन्फ्रेंस में सेना यह प्रस्ताव रखेगी तीनों सेनाओं के बारे में ज्वाइंटनेस पर अध्ययन तभी हो, जब तीनों सेनाओं के प्रमुख इसकी संभावना, जरूरत और उपयोगिता को लेकर सहमत हों। सहमति बनने के बाद सेनाओं के मुख्यालयों को यह बता दिया जाना चाहिए कि ज्वाइंट स्टडी वक्त पर पूरी होनी जरूरी है।

कम्बाइंड कमांडर्स कॉन्फ्रेंस में प्रधानमंत्री की मौजूदगी में ज्वाइंटनेस को लेकर इसी साल जनवरी में विचार हुआ था। जानकार बताते हैं कि प्रधानमंत्री ने तीनों सेनाओं के बीच ज्यादा तालमेल पर जोर दिए जाने की वकालत की थी।

सरकार ने हाल में लेफ्टिनेंट जनरल शेकतकर कमेटी की 99 से में 65 सिफारिशों को मंजूरी दी थी बाकी 34 सिफारिशों पर भी जल्द निर्णय की तैयारी चल रही है। इन सिफारिशों में एक प्रस्ताव यह भी है कि सरकार के लिए रणनीतिक मामलों पर सिंगल प्वाइंट सलाहकार की बहाली की जाए। कहा जा रहा है कि सरकार जल्द कोई फैसला ले सकती है। वायुसेना के एक बड़े ऑफिसर ने भी हाल में ज्वाइंटनेस को जरूरी बताया था। सेना अध्यक्ष जनरल बिपिन रावत ने कहा है कि ज्वाइंटनेस के स्थिति में आर्मी की प्रधानता रखी जानी चाहिए।

सेनाओं में तालमेल के लिए तीनों सेनाओं के प्रमुखों में जो सबसे वरिष्ठ होता है उसे ‘चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी’ का चेयरमैन चुना जाता है। करगिल के युद्ध के बाद के. सुब्रमण्यम कमेटी ने चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ पद के गठन का प्रस्ताव रखा था पर तीनों सेनाओं में इस पर सहमति नहीं बनी क्योंकि यह सबसे सीनियर और पावरफुल पद होगा।

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