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रक्षा मंत्रालय ने सरकार से मांगा 20 हजार करोड़ का अतिरिक्त बजट

भारतीय-सेना

नई दिल्ली। डोकलाम पर चीन व भारत के बीच चल रहे तनाव के बीच रक्षा मंत्रालय ने केंद्र सरकार से  20 हजार करोड़ रुपए के अतिरिक्त बजट की मांग की है। ये मांग ऐसे समय आई है, जब डोकलाम पर भारत और चीन के बीच लगभग दो महीने से गतिरोध बना हुआ है। वित्त वर्ष 2017-18 के लिए 2.74 लाख करोड़ रुपये का रक्षा बजट पेश किया गया था। पिछले वित्त वर्ष की तुलना में हालांकि इसमें 6 फीसदी की बढ़ोतरी की गई थी।





हथियारों की खरीद पर जोर दे रही है भारतीय सेना

कुछ हफ्ते पहले ही रक्षा मंत्रालय ने सेना के उप-प्रमुख को युद्ध से जुड़े हथियारों को खरीदने को कहा था। सरकार ने हाल ही में भारतीय सेना के पास हथियारों की कमी के चलते हथियारों की खरीद पर जोर दिया है गौरतलब है कि सेना को किसी भी समय कम से कम 10 दिन के युद्ध के लिए तैयार रहना होता है।

खर्च हो चुका है, वार्षिक बजट का एक तिहाई हिस्सा

2017 में केंद्र की ओर से 2,74,113 करोड़ रुपए का रक्षा बजट पेश किया गया था, जो GDP का 1.62 प्रतिशत था। रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, बजट का आधा हिस्सा उन्हें मिल चुका है, जिसमें से एक तिहाई खर्च भी हो चुका है।

बता दें कि इससे पहले संसद में रखी गई नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में बताया गया था कि कोई युद्ध छिड़ने की स्थिति में सेना के पास महज 10 दिन के लिए ही पर्याप्त गोला-बारूद है। कैग की रिपोर्ट में कहा गया कि कुल 152 तरह के गोला-बारूद में से महज 20% यानी 31 का ही भंडार ठीक स्थिति में पाया गया, जबकि 61 प्रकार के गोला बारूद का भंडार चिंताजनक रूप से कम पाया गया। गौरतलब है कि भारतीय सेना के पास कम से कम इतना गोला-बारूद होना आवश्यक है, जिससे वह 20 दिनों तक जंग से निपट सके।

हालांकि, इससे पहले सेना को 40 दिनों का सघन युद्ध लड़ने लायक गोला-बारूद अपने वॉर वेस्टेज रिजर्व (WWR) में रखना होता था, जिसे 1999 में घटा कर 20 दिन कर दिया गया था। ऐसे में कैग की यह रिपोर्ट गोलाबारूद की भारी किल्लत उजागर करती है, लेकिन जिस तरह चीन सीमा पर विवाद बढ़ता नजर आ रहा है। ऐसे में जंग की आशंका के चलते रक्षा मंत्रालय द्वारा अतिरिक्त बजट की मांग जायज ही है।

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