DEFENCE

चीन को मुंहतोड़ जवाब की तैयारी, BRO शक्तियों में इजाफा

सड़क निर्माण

नई दिल्ली। भारत-चीन की सेना में तनातनी के बीच डोकलाम में सरकार ने रणनीतिक तौर पर खास सड़कों के निर्माण में तेजी लाने का फैसला लिया है। सड़कों के निर्माण में देरी से चिंतित रक्षा मंत्रालय ने सीमा सड़क संगठन (BRO) के प्रशासनिक और वित्तीय अधिकारों में इजाफा किया है।





केंद्र सरकार का यह फैसला नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) के 61 महत्वपूर्ण रणनीतिक सड़कों के निर्माण में BRO द्वारा देरी को लेकर कड़ी आपत्ति जताने के एक महीने बाद आया है। भारत-चीन सीमा सड़क परियोजना के तहत कुल 3,409 किमी लंबी सड़कें बनाई जानी हैं।

रविवार को रक्षा मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा कि निर्माण कार्य में तेजी लाने और सेना की जरूरतों के अनुरूप परिणाम के लिए बीआरओ में थोड़े बदलाव लाने का फैसला लिया गया है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार भारतीय सेना चीन सीमा पर सड़क परियोजनाओं में देरी से खुश नहीं थी और रक्षा मंत्रालय से इन्हें जल्द से जल्द पूरा करने की मांग की थी। इन परियोजनाओं को साल 2012 में ही पूरा करना था।

डीजी को मिला अब 100 करोड़ की खरीदारी का वित्तीय अधिकार 

रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि प्रशासनिक अधिकारों के अतिरिक्त सरकार ने बीआरओ के महानिदेशक को 100 करोड़ रुपये तक की खरीदारी का वित्तीय अधिकार दिया है। पहले महानिदेशक को 7.5 करोड़ रुपये तक के स्वदेशी उपकरण और तीन करोड़ रुपये के आयातित उपकरण खरीदने की शक्ति प्राप्त थी। बीआरओ का एक चीफ इंजीनियर अब 50 करोड़, अतिरिक्त महानिदेशक (ADG) 75 करोड़ और महानिदेशक 100 करोड़ तक के ठेकों के लिए प्रशासनिक मंजूरी दे सकता है।

सड़क परियोजनाओं के कार्य में बड़ी कंपनियों को लगाने की बीआरओ को आदेश देने के लिए नीतिगत दिशानिर्देश को भी मंजूरी दी है। साथ ही, जवाबदेही तय करने को लेकर कार्य की प्रगति की ऑनलाइन निगरानी के लिए एक साफ्टवेयर बनाया जा रहा है।

मंत्रालय ने कहा है कि अब काम चाहे विभागीय स्तर का हो या कांट्रैक्ट के आधार पर, चीफ इंजीनियर को 50 करोड़ रुपये, एडीजी को 75 करोड़ रुपये और डीजी को 100 करोड़ रुपये तक के काम को प्रशासनिक मंजूरी देने का अधिकार होगा। नए प्रावधानों के तहत चीफ इंजीनियर को 10 की जगह 100 करोड़ और एडीजी को 20 की जगह 300 करोड़ रुपये के कांट्रैक्ट पर अमल मंजूर करने का अधिकार होगा।

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