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कैप्टन विक्रम बत्रा पर बनेगी बायोपिक, यह एक्टर निभाएगा मुख्य किरदार

नई दिल्ली।  फिल्में लोगों के दिलों पर एक गहरा और दीर्घकालीन प्रभाव डालती हैं और ये फिल्में यदि भारतीय सेना की पृष्ठभूमि पर बनीं हों तो दर्शकों में देश के प्रति मर-मिटने का जज्बा तथा सेना के जवानों के प्रति प्यार और सम्मान का भाव पैदा करती हैं। बॉलीवुड में कई ऐसी बायोपिक फिल्में बनाई गईं हैं जो सेना के जवानों  की असल जिन्दगी पर आधारित हैं। अब भारतीय सेना के जांबाज कारगिल में शहीद हुए ‘कैप्टन विक्रम बत्रा’ पर भी बायोपिक बनने जा रही है जिसमें अभिनेता सिद्धार्थ मल्होत्रा कैप्टन विक्रम बत्रा के किरदार में नजर आएंगे।





इस साल गर्मी में शुरू हो जाएगी फिल्म की शूटिंग 

एक अखबार में प्रकाशित खबर के मुताबिक सिद्दार्थ ने बताया कि हम इस आइडिया पर काम करने को लेकर काफी दबाव में हैं कि उन्होंने  क्या किया है? क्योंकि इसे हमें फिल्म में ऊपर रखना है। यही कारण है कि इस फिल्म को शुरू करने में भी काफी समय लग रहा है। हम इस कहानी पर बेहतर ढंग से काम करना चाहते हैं। यह एक काल्पनिक कहानी नहीं हैं जिसमें जल्दबाजी की जाए।

सिद्दार्थ ने कहा,’ मैं उम्मीद करता हूं कि जब भी यह कहानी बड़े परदे पर आएगी तो कैप्टन विक्रम बत्रा की फैमिली खुश होगी और वे गर्व महसूस करेंगे। उनके मुताबिक यह उनकी पहली बायोपिक है जिसके लिए वह काफी उत्साहित हैं। सिद्दार्थ इस फिल्म में डबल रोल में नजर आएंगे। विक्रम का एक जुड़वां भाई भी है। लेकिन फिल्म कैप्टेन विक्रम बत्रा के बारे में ज्यादा है तो हम प्लानिंग कर रहे है कि इसके लिए दोहरी भूमिका ही एक उपाय है। सिद्धार्थ के मुताबिक उन्होंने सेना में इतने लोगों को प्रभावित किया। ‘मैं कहूंगा कि वह केवल एक पर्सनेलिटी ही नहीं बल्कि एक कहानी है जिसे बताया जाना आवश्यक है। सिद्धार्थ के अनुसार फिल्म की शूटिंग इस गर्मी से शुरू होने की उम्मीद है। उन्होंने सीमावर्ती इलाकों में जाकर, बीएसएफ के जवानों की मीटिंग्स, उनकी जीवनशैली, अनुशासन और प्रशिक्षण देखकर अपना प्रशिक्षण शुरू कर दिया है।

कौन हैं कैप्टन विक्रम बत्रा

1 जून, 1999 को विक्रम बत्रा को उनकी टुकड़ी के साथ करगिल युद्ध में भेज दिया गया। हम्प और राकी नाम की जगह को जीतने के बाद उसी समय विक्रम को प्रमोशन देकर कैप्टन बना दिया गया।…इसके बाद शुरू हुई कैप्टन विक्रम बत्रा की वो परीक्षा जिसने दुनिया को उनके साहस और जज्बे से वाकिफ कराया। सबसे महत्वपूर्ण चोटियों में से एक 5140 चोटी पर पाकिस्तानी सेना ने कब्ज़ा कर श्रीनगर-लेह मार्ग को निशाना बनाया हुआ था, तब कैप्टन बत्रा को इस छोटी को पाकिस्तानी सेना से मुक्त कराने का ज़िम्मा सौपा गया। कैप्टन बत्रा और उनके साथियों ने दुश्मन को मुंहतोड़ जवाब देते हुए चोटी 5140 को फतह कर लिया। चोटी को फतह करने के बाद कैप्टन बत्रा ने रेडियो के जरिए जब विजयघोष में ‘ये दिल मांगे मोर’ कहा तो सिर्फ सेना ही नही बल्कि पूरे भारत में उनके वीरगाथा की आवाजें गूंज उठी लेकिन दुश्मन द्वारा अचानक किये गए विस्फोट में कैप्टन विक्रम बत्रा शहीद हो गए उन्हें ‘करगिल का शेर’ कहा गया। 5 अगस्त, 1999 को कैप्टन विक्रम बत्रा को देश के सबसे बड़े वीरता सम्मान परमवीर चक्र से नवाज़ा गया।

रक्षक की राय : सेना व सुरक्षा बलों के जवानों की चुनौती कितनी कठिन होती है आम नागरिक जल्दी इसे नहीं समझ पाता। सेना के जवानों की असल जिन्दगी पर आधारित फ़िल्में ही  दर्शकों में देशभक्ति की भावना भरती हैं। ‘कारगिल का शेर’ कहे जाने वाले कैप्टन विक्रम बत्रा पर बनने वाली बायोपिक ऐसी फिल्मों की दिशा में एक और मील का पत्थर साबित होगी।

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