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स्पेशल रिपोर्ट: मानवाधिकारों का सर्वोच्च सम्मान करती है सेना- जनरल रावत

सेना प्रमुख बिपिन रावत

नई दिल्ली। थलसेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने कहा है कि भारतीय सेनाएं मानवाधिकारों का अत्याधिक सम्मान करती हैं। यहां राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के एक समारोह में जनरल रावत ने कहा कि भारतीय सशस्त्र सेनाएं काफी अनुशासित हैं औऱ वे हमेशा मानवाधिकार कानूनों का आदर करती हैं।





उन्होंने कहा कि भारतीय सेनाएं न केवल अपने लोगों के मानवाधिकारो का आदर करती हैं बल्कि दुश्मन के सैनिकों के साथ भी वही व्यवहार करती है। ये जेनेवा संधि के प्रावधानों के अनुरुप होते है। मानवाधिकार आयोग के सीनियर अधिकारियों को सम्बोधित करते हुए जनरल रावत ने कहा कि भारतीय सेनाओं का मूल मंत्र इन्सानियत और शराफत है औऱ वे युद्ध के वक्त युद्धबंदियों का सर्वाधिक सम्मान करती हैं।

उन्होंने कहा कि सशस्त्र सेनाओं के हमलों के विपरीत आतंकवादियों द्वारा किये गए हमलों का हिसाब नहीं रखा जाता। इसलिये प्रति आतंकवादी औऱ प्रति विद्रोही तत्वों के खिलाफ कार्रवाई को जनता का दिल जीतने के नजरिये से देखना चाहिये। उन्होंने बताया कि भारतीय थलसेना ने 1933 में ही मानवाधिकार सेल का गठन किया था। इसका तरह अब महानिदेशालय स्तर पर किया जा रहा है। इसकी अगुवाई अतिरिक्त महानिदेशक स्तर का अधिकारी करेगा। उन्होंने बताया कि अब मानवाधिकार कानूनों के प्रावधानों के तहत हर प्रतिविद्रोही कार्रवाई के बाद अदालती जांच करवाई जाएगी।

उन्होंने बताया कि इस साल अक्टूबर से मिलिट्री पुलिस बल में महिला जवानों की भर्ती शुरु हो जाएगी। प्रतिविद्रोही कार्रवाई के दौरान महिलाओं से होने वाले दुर्व्यवहार की शिकायतों के मद्देनजर प्रतिविद्रोही कार्रवाई के दौरान महिला पुलिस को भी साथ में भेजा जाएगा।

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