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अब सेना को मिलेगी देसी स्नाइपर राइफल

बंगाल की ईशापुर आयुध फैक्टरी ने सेना के लिए एक बेहतरीन स्नाइपर राइफल बनाई है।

नई दिल्ली। सरकार द्वारा अभी तक सेना के लिए विदेशी हथियारों पर निर्भर रहना पड़ता था। वहीं ‘मेक इन इण्डिया’ के तहत सरकार अब देश में ही हथियारों के निर्माण पर जोर दे रही है। इसी के तहत भारत की एक कंपनी ने सेना के लिए एक विशेष स्नाइपर राइफल का निर्माण किया है। यह विदेशी कंपनी से खरीदी जाने वाली स्नाइपर से काफी बेहतर बताई जा रही है। सेना के स्नाइपर के पास दुनिया की सबसे बेहतरीन राइफल होती है। भारत में अभी तक विदेशों से खरीदी गई स्नाइपर राइफल ही इस्तेमाल की जाती है लेकिन पश्चिम बंगाल की ईशापुर आयुध फैक्टरी ने सेना के लिए एक बेहतरीन राइफल बनाई है।





कोलकाता पुलिस है पहला ग्राहक

भारत के स्नाइपर जर्मनी में बनी हेक्लर एंड कोच यानी एच एंड एन राइफल के मुकाबले काफी बेहतर है। इसकी कीमत भी जर्मनी की राइफल से एक तिहाई कम है साथ ही यह  काफी हल्की और 800 मीटर की दूर तक मार करने में सक्षम है। कोलकाता पुलिस आयुक्त राजीव कुमार के मुताबिक सबसे पहले ऑर्डर देने वालों में कोलकाता पुलिस है और अब इसे अपने हथियार के रूप में शामिल करने जा रहे हैं।

गौरतलब है कि इसी फैक्टरी में बनी इंसास राइफल का भारतीय सुरक्षाबल इस्तेमाल करते हैं। इस राइफल ने कारगिल के युद्ध में बड़ी भूमिका निभाई थी।

क्यों है खास ?

ये देसी स्नाइपर राइफल सुरक्षा के लिए अहम है। विशिष्ट लोगों की सुरक्षा में लगे जवान स्नाइपर का इस्तेमाल करते हैं। दुश्मन को टार्गेट कर ठिकाने लगाने में सक्षम है दुश्मन को दूर से ही निष्क्रिय करने में इन बंदूकों की अहम भूमिका होती है। इस राइफल का वजन 6.2 किलोग्राम है और कीमत ढाई लाख रुपये है जबकि जर्मन स्नाइपर राइफल का वजन 7.2 किलो है। साढ़े सात लाख की कीमत वाली ये राइफल केवल 500 मीटर तक ही मार करने में सक्षम है।

खास बात यह है कि इस राइफल का विकास व निर्माण पिछले एक साल से चल रहा था और अब यह तैयार हो चुकी है। देसी तकनीक से निर्मित राइफल के बनने से विदेशी हथियारों पर निर्भरता कम होगी और देसी मुद्रा की बचत भी होगी।

 

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