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सेना प्रमुख बनने में सबसे आगे हैं इन्फेंट्री के जवान

जनरल करिअप्पा और मानेकशॉ

दुनिया में आज एक से बढ़कर एक खतरनाक हथियार हैं। हथियार भी ऐसे कि हजारों किलोमीटर दूर बैठकर किसी भी शहर को निशाना बनाया जा सकता है। बेशक मिसाइलों और परमाणु बमों के बल पर किसी भी शहर को तबाह किया जा सकता है, लेकिन जहां तक किसी भी लड़ाई में जीत की बात है, वह मानव शक्ति के बिना जीती नहीं जा सकती। यही वजह है कि जब भी सेना की बात होती है तो पीठ पर बैग और हाथ में राइफल लिए  सरहद पर तैनात जवान की छवि कौंधती है। सैकड़ों वर्ष पहले जब सेना में रथ, हाथी और घोड़ों का बोलबाला होता था तब भी पैदल जवानों का अपना महत्व होता था और आज भी जब युद्ध मशीनों के बल पर लड़ने की बात की जाती है, पैदल सैनिकों की जगह कोई नहीं ले पाया है और लगता नहीं कि भविष्य में कोई ले भी पाएगा।





भारतीय सेना के अधिकांश सेनाध्यक्षों का नाता इन्फेंट्री से रहा है। इन्फेंट्री से सेनाध्य़क्ष बनने वाले पहले अफसर थे फील्ड मार्शल के.एम. करिअप्पा। करिअप्पा 15 जनवरी 1949 को सेना प्रमुख बने। वह चार वर्ष तक सेनाध्यक्ष रहे। करिअप्पा से पहले भारतीय सेना के प्रमुख ब्रिटिश अफसर ही बनते थे।

इन्फेंट्री से सेनाध्यक्ष बनने वाले दूसरे सेना प्रमुख थे जनरल एसएम श्रीनागेश। वह 14 मई 1955 से 7 मई 1957 तक सेनाध्यक्ष रहे। इसके बाद जनरल केएस थिमैया ने सेना प्रमुख का पद संभाला। वह 1961 तक इस पद पर रहे। जनरल पीएन थापर अगले सेना प्रमुख बने और 19 नवंबर 1962 तक इस पद पर बने रहे।

अगले सेनाध्यक्ष बने एसएचएफजे मानेकशॉ। उन्होंने 8 जून 1969 को सेना प्रमुख का पदभार संभला। वर्ष 1971 में उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध में भारतीय सेना का सफल नेतृत्व किया। इसी युद्ध में दुनिया के पटल पर बांग्लादेश का उदय हुआ। युद्ध के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने उन्हें फील्ड मार्शल का रैंक देने का फैसला किया।

जनरल जी.जी. बिवुर ने 15 जनवरी 1973 को मानेकशॉ की जगह ली। वह 31 मई 1975 तक सेना प्रमुख रहे। उनकी जगह पर जनरल टीएन रैना सेना प्रमुख बने। वह 31 मई 1978 तक इस पद पर रहे।

वर्ष 1981 में जनरल केवी कृष्णराव सेना प्रमुख बने। वे भी इन्फेंट्री से थे। वह 31 जुलाई 1983 तक इस पद पर रहे। वर्ष 1985 (1 फरवरी) से 31 मई1988 तक जनरल के. सुंदरजी सेना प्रमुख रहे। वर्ष 1988 से 1997 के बीच चार सेना प्रमुख बने और इन चारों का ही इन्फेंट्री से कोई नाता नहीं रहा।

वर्ष 1997 में 1 अक्टूबर को जनरल वीपी मलिक सेना प्रमुख बने और 30 सितंबर 2000 तक इस पद पर रहे। उन्हीं के नेतृत्व में सेना ने करगिल से पाकिस्तानी घुसपैठियों को खदेड़ा।

वर्ष 2003 के पहले दिन जनरल एनसी विज ने सेना प्रमुख का पद संभाला। वह 31 जनवरी 2005 तक इस पद पर रहे। उनकी जगह 1 फरवरी 2005 को सेना प्रमुख जेजे सिंह बने और 30 सितंबर 2007 तक इस पद पर रहे।

इन्फेंट्री से अगले सेना प्रमुख जनरल वीके सिंह (1 अप्रैल 2010 को) बने। वह 31 मई 2012 को सेवा निवृत्त हुए। उनकी जगह जनरल बिक्रम सिंह ने ली। वह भी इन्फेंट्री से थे। जनरल बिक्रम सिंह 31 जुलाई 2014 को सेवानिवृत्त हुए। उनकी जगह जनरल दलबीर सिंह सुहाग ने ली। पिछले वर्ष 31 दिसंबर को वह सेवा निवृत्त हुए। उनकी जगह जनरल बिपिन रावत ने ली।

इस तरह आजाद भारत के कुल 25 सेना प्रमुखों में से 15 का नाता इन्फेंट्री से है। Chief of the Army Staff का पद 1 अप्रैल 1955 को सृजित हुआ। इससे पहले सेना प्रमुख Commander-in-Chief, Indian Army कहलाता था।

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