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खुलासा: सेना में गलत नाम-पते से विदेशियों की भर्ती

गोरखा-सैनिक

लखनऊ। एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (एटीएस) ने फर्जी पहचान और पते के आधार पर भर्ती मामले का पर्दाफाश किया है। यूपी एटीएस ने सेना में नकली तरीके से भर्ती होकर तैनाती पा चुके एक जवान को वाराणसी से गिरफ्तार किया है। देश की सुरक्षा से जुड़े इस खुलासे के बाद दो अन्य नेपाली नागरिकों की तलाश जारी है। एटीएस ने इस मामले में सेना में भर्ती हो चुके तीन जवानों के खिलाफ मामला दर्ज किया था और जांच जारी है। तीनों गोरखा राइफल्स में भर्ती हुए थे।





मंगलवार को गिरफ्तार युवक को लखनऊ की कोर्ट में पेश किया जाएगा। एटीएस उसे रिमांड पर लेने के लिए अर्जी दाखिल करेगी। यूपी एटीएस को यह सूचना मिली थी कि वाराणसी के 39 गोरखा ट्रेनिंग सेंटर में जनवरी, 2016 में हुई सेना भर्ती में कुछ नेपाली नागरिक गलत नाम-पते के माध्यम से चयनित कर लिए गए हैं।

जांच में तीन नाम सामने आए जिनके दस्तावेज नकली निकले। वे किसी दूसरे की पहचान से भर्ती हुए थे। तीनों के खिलाफ एक अक्टूबर को मुकदमा दर्ज कराया गया था और जांच अधिकारी विजय मल को सौंपी गई थी। 16 अक्टूबर को तीनों आरोपियों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया गया था। एटीएस ने इन पर नजर रखनी शुरू कर दी थी और सोमवार को इनमें से एक दिलीप गिरि को वाराणसी में गिरफ्तार कर लिया गया।

एटीएस के आईजी असीम अरुण के मुताबिक पूछताछ में दिलीप गिरि ने कहा कि उसका असली नाम विष्णु लाल भट्टाराय है और वह नेपाल का रहने वाला है। उसने स्वीकार किया कि एक दलाल ने पांच लाख रुपये लेकर उसने उसे सेना में जवान के पद पर बहाली कराया है। फिलहाल, वह गोरखा राइफल्स, न्यू जलपाईगुड़ी, पश्चिम बंगाल में तैनात था। आईजी ने कहा कि दो अन्य अभियुक्तों में शिवांग बालियान गोरखा राइफल्स, भुज और मनोज कुमार बस्नेत गोरखा राइफल्स, जलपाईगुड़ी, प. बंगाल में कार्यरत है। अभी वे अवकाश पर हैं और सेना के सहयोग से उनकी गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं।

उन्होंने कहा कि यह मामला एक तरह से आइडेंटिटी थेफ्ट का है और उनकी गिरफ्तारी के बाद ही मालूम चलेगी कि नकली पहचान पत्र पर वे क्यों बहाल हुए और उनकी असली पहचान क्या है। इनकी बहाली कराने वाले एजेंट की भी सरगर्मी से तलाश की जा रही है।

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