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जान की परवाह नहीं करते बिहार रेजीमेंट के जवान, जानें 11 अहम बातें

जब-जब दुश्मन ने देश की तरफ आंखें उठाई है ‘बिहार रेजीमेंट’ के योद्धा अपनी रेजीमेंट की आन-बान और शान का अनुसरण करते हुए देश की रक्षा के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर देते हैं। यही वजह है कि जब भी किसी युद्ध और उसमें शहीद हुए जवानों का जिक्र होता है तो सेना की ‘बिहार रेजीमेंट’ की शहादत की चर्चा हमेशा होती है। इस रेजीमेंट ने हमेशा इस बात का प्रमाण दिया है कि कैसे जान की परवाह किए बिना देश को दुश्मन से बचाया जाता है। आज हम आपको बता रहे हैं ‘बिहार रेजीमेंट’ से जुड़े ये नौ अनजाने फैक्ट्स :





 सिपाही बटालियन के रूप में रखी गई नींव 

बिहार रेजिमेंट

‘बिहार रेजीमेंट’ को ये नाम भले ही 19वीं सदी में मिला हो लेकिन सन् 1757 में पटना में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के लॉर्ड क्लाइव ने ‘सिपाही बटालियन’ के रूप में इसकी नींव रखी थी। उसके द्वारा बनाई गई ‘सिपाही बटालियन’ में तब सिर्फ बिहार के भोजपुर क्षेत्र के पुरुषों को भर्ती किया जाता था।

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