Army

14,000 फीट की ऊंचाई पर सेना का युद्धाभ्यास, ‘इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप्स’ का प्रदर्शन

इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप्स

नई दिल्ली। भारतीय थलसेना ने कम जवानों को लेकर लड़ी जाने वाली नई युद्ध रणनीति की क्षमताओं का आकलन पहले युद्धाभ्यास में किया। उस युद्धाभ्यास का सबसे बड़ा सबक जो सामने आया है वह यह कि बेहतरीन संचार को सुनिश्चित करने के लिए सिग्नल से जुड़े पहलुओं से कोई समझौता नहीं हो सकता। सेना सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी।





बता दें कि भारतीय थलसेना ने तकरीबन एक माह पहले ‘लाइन ऑफ एक्चुएल कंट्रोल- LaC ‘ से करीब 90 किमी दूर अरुणाचल प्रदेश के सेला में 14,000 फीट की ऊंचाई पर यह अभ्यास किया। इस युद्धाभ्यास का अब आकलन किया जा रहा है। यह ऊंचाई वाले दुर्गम युद्ध क्षेत्रों में ‘इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप्स (IBGs)’ के प्रदर्शन को समझने के लिए किया जा रहा है।

‘द इंडियन आर्मी कोर ऑफ सिग्नल्स’ के पास सेना के संचार नेटवर्क को संभालने की जिम्मेदारी है। यह खुफिया सूचनाएं एकत्र करने और इलेक्ट्रोनिक वॉरफेयर जैसे ऑपरेशन्स में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ‘इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप्स’ भारतीय सेना के नए फॉर्मेशन्स हैं जिन्हें युद्ध क्षमताओं को बढ़ाने के लिए अपनाया जा रहा है। इसके लिए दुश्मन पर हमले में अविलंब और अधिक घातक होने पर बल दिया जा रहा है। IBGs वह ब्रिगेड होगी जो खतरों के आधार पर और दुर्गम क्षेत्रों में भी क्षमताओं से लैस होगी। IBGs के आने से इनफैंट्री, आर्टिलरी, एयर डिफेंस को सेना के ‘कोर लेवल फॉर्मेशन्स’ में एक ही कमांड के अर्न्तगत लाया जाएगा।

सेना के विभिन्न अंग रिपोर्ट तैयार करने में लगे हैं, जिसे जमा करने के बाद अंतिम तौर पर जो आकलन होगा वह ईस्टर्न कमान की ओर सेना मुख्यालय को भेजा जाएगा।

गौरतलब है कि कोलकाता स्थित ईस्टर्न कमान ‘लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल- LaC’  के साथ चीन फ्रंटियर पर ऑपरेशन के लिए जिम्मेदार है। सेना प्रमुख बिपिन रावत ने नए IBGs की तैयारी को जांचने के लिए हुए वॉर गेम्स की समीक्षा के लिए पिछले माह सेला (अरुणाचल) का दौरा किया था।

 

 

Comments

Most Popular

To Top