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बहादुरी का दूसरा नाम है इन्फेंट्री, पैदल सेना के 7 बड़े ऑपरेशन

भारत के खिलाफ दुश्मन ने जब भी अपने नापाक मंसूबों को अंजाम देने की हिमाकत की तब भारतीय थल सेना की पैदल सैन्य टुकड़ियों ने न केवल उन्हें नाकाम किया बल्कि अपनी ताक़त, बहादुरी और पराक्रम का ऐसा परिचय दिया है जो पूरे विश्व के लिए उदाहरण बन गया। भारत ही नहीं बल्कि हर देश की सेना में इन्फेंट्री की महत्वपूर्ण भूमिका होती है क्योंकि इन्फेंट्री के बिना किसी भी देश के लिए युद्ध के मैदान में दुश्मन से जीतना लगभग असंभव ही है। आज हम आपको भारतीय सेना की इन्फेंट्री के कुछ ऐसे ही ऑपरेशंस के बारे में बता रहे जिनमें पैदल सेना ने दुश्मन को मुहंतोड़ जवाब दिया।





ऑपरेशन विजय (गोवा मुक्ति)

देश की आजादी के बाद हुई किसी बड़ी कार्रवाई के तौर पर गोवा मुक्ति के बारे में आप शायद ही जानते हों। आर्मी इन्फेंट्री द्वारा किये गए इस ऑपरेशन में भारतीय सेना ने गोवा दमन व दीव को साढ़े चार सौ वर्ष के पुर्तगाली आधिपत्य से आजाद काराया था। गोवा, दमन और दीव में पुर्तगालियों का शासन था भारत सरकार की बातचीत की मांग को पुर्तगालियों ने ठुकरा दिया नतीजन भारत सरकार ने ऑपरेशन विजय चलाया और सेना की छोटी टुकड़ी भेजी। 18 दिसंबर 1961 के दिन कार्रवाई की गई। भारतीय सैनिकों की टुकड़ी ने गोवा के बॉर्डर में प्रवेश किया। 36 घंटे से भी ज्यादा वक्त तक जमीनी, समुद्री और हवाई हमले हुए। 4 राजपूत रेजीमेंट, 1 पैरा, 2 पैरा, 2 सिख लाइट इन्फेंट्री बटालियन ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके बाद पुर्तगाली सेना ने बिना किसी शर्त के भारतीय सेना के समक्ष 19 दिसंबर को आत्मसमर्पण कर दिया।

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