Air Force

स्पेशल रिपोर्ट: अमेरिका से अगले साल मिलेंगे सी-हॉक हेलिकॉप्टर

सी-हॉक हेलिकॉप्टर
फाइल फोटो

ललितमोहन बंसल, लॉस एंजेल्स से

अमेरिकी नौसेना हिंद महासागर में चीन की नौसेना की बढ़ती गतिविधियों पर पैनी नज़र रखने के लिए भारत को प्राथमिकता के आधार पर तीन अत्याधुनिक एम एच-60 आर सी-हॉक हेलिकॉप्टर देगी। ये हेलिकॉप्टर अगले वर्ष के प्रारंभ में भारत को हस्तांतरित कर दिए जाएँगे। चीन पिछले कुछ अरसे से हिंद प्रशांत महासागर में अपने युद्धपोत और जलतल के भीतर ड्रोन (अंडर वाटर ड्रोन) की मदद से समुद्री प्राकृतिक संसाधनों के दोहन और गुप्तचरी के उद्देश्य से तैनाती कर रहा है। ये हेलिकॉप्टर ‘लाकहीड की सिकोर्स्की यूनिट’ में बने हैं। ‘नेवल न्यूज़’ के अनुसार भारत को कुल 21 हेलीकाप्टर दिए जाने हैं, जिनकी क़ीमत 2.6 अरब डालर बताई जाती है। इन हेलिकॉप्टरों की विशेषता यह है कि ये दुश्मन की पनडुब्बियों पर बाज़ की तरह झपटते हैं, उनका पता लगाते हैं और ज़रूरत पड़ने पर बचाव कार्यों में अपनी सेना की भी मदद करते हैं।





‘सिकोर्सकी नेवल हेलिकॉप्टर प्रोग्राम’ निदेशक टौम कोने ने हाल में मीडिया से यह जानकारी साझा करते हुए कहा कि अमेरिकी सेना अगले तीन दशक तक भारत की मदद करती रहेगी। उन्होंने कहा कि तीन खोजी हेलिकॉप्टर प्राथमिकता के आधार पर अगले वर्ष के प्रारंभ में हस्तांतरित कर दिये जाएँगे। उन्होंने हेलिकॉप्टर हस्तांतरण में तेज़ी लाने के आदेश दे दिए हैं। उनका कहना था, चीन की नापाक हरकतों को देखते हुए ही यह निर्णय लिया गया है। उन्होंने बताया कि इन तीनो हेलिकॉप्टर को भारतीय संचार माध्यमों के अनुकूल बनाए जाने में कुछ महीनों का समय लगेगा। इनके अलावा पूर्व समझौते के अनुरूप 21 हेलीकाप्टर सन 2023 और 2024 में दिए जाएँगे। ये हेलिकॉप्टर सलप्लाई करने का कार्य ऐसे समय में हो रहा है, जब कोविड -19 का प्रकोप है और लोकहीड यूनिट के इंजीनियर छुट्टी पर जा रहे हैं। इस से 200 इंजीनियरों के रोज़गार में इज़ाफ़ा होगा।

डिफ़ेंस मीडिया रिपोर्ट के अनुसार भारत पिछले कुछ अरसे से ऐसे टोही हेलीकाप्टर की ज़रूरत महसूस कर रहा था, जिसकी जलतल के भीतर और ऊपर मारक क्षमता ज़बरदस्त हो। भारत के पास अभी ब्रिटिश काल के नेवल हेलिकॉप्टर थे। जो जर्जर हो चुके थे। ये तीन एम एच -60 सी- हॉक हेलिकॉप्टर उस समय मिल रहे हैं, जब हिंद प्रशांत महासागर में चीन अपनी नौ सैनिक गतिविधियां बढ़ाने में लगा है। चीन हिंद महासागर में जलस्तर के नीचे आधुनिक पनडुब्बियाँ, युद्धपोत, नौ सेना ड्रोन और अपनी नौसेना को सुदृढ़ करने में लगा है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि पूर्व समझौते के अनुरूप अमेरिका ये हेलिकॉप्टर ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम के तहत नहीं है। इसके बावजूद अमेरिकी रक्षा विभाग के इंजीनियर भारतीय रक्षा उद्योग कर्मियों के साथ मिल कर हेलीकाप्टर में कुछ छोटे कामों को भारत में रहते हुए अंजाम दे सकेंगे। भारतीय रक्षा उद्योग कर्मियों को हेलिकॉप्टर के रखरखाव के बारे में प्रशिक्षित किए जाने के बारे में कार्यक्रम तय किया गया है।

इन एम एच -60 सी हाँक हेलिकॉप्टर में ज़्यादातर परिवर्तन संचार और डाटा संबंधी किए जाने हैं। इस से यह अभिप्राय है कि भारतीय नौ सैनिक हेलिकॉप्टर चालक दल अपनी सेटेलाइट से सीधे सम्पर्क कर सकेंगे। इसके लिए स्वदेशी ‘सटकोम’ डाटा लिंक डाले जाने हैं। इस डाटा परिवर्तन के बाद चालक दल अपने अन्यान्य नौ सेना जहाज़ों से सम्पर्क रख सकेंगे। इनके अलावा इनमें जलतल पर नाव की तरह विचरण ‘फलोटेशन सिस्टेम’ में भी बदलाव किए जाएँगे, जो अमेरिकी नेवी सिस्टम डाटा स्तर से भिन्न होंगे। इन हेलिकॉप्टर का उपयोग एंटी सब मैरीन वारफ़ेयर में महत्वपूर्ण योगदान होगा।

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