Air Force

स्पेशल रिपोर्ट: LCA ने एक और मुकाम किया हासिल

तेजस विमान

नई दिल्ली। भारत में पिछले तीन दशकों से विकास किये जा रहे हलके लड़ाकू विमान एलसीए (तेजस) की अंतिम समाधात स्वीकृति ( फाइनल ऑपरेशनल क्लीयरेंस- एफओसी ) वाली किस्म की पहली उड़ान कामयाब रही है।





एफओसी के विमान अडवांस्ड उपकरणों से लैस होंगे। इनमें आसमान में ही इंधन भरने की सुविधा, आंखों की नजर से दूर तक मार करने वाली मिसाइलें आदि शामिल हैं लेकिन इसमें आएसा रेडार नहीं लगें होंगे। ये रेडार एलसीए की नई विकसित की जा रही एलसीए-मार्क-1ए में लगाए जाएंगे।

इसके बाद वायुसेना द्वारा आर्डर दिये गए तेजस विमानों को शामिल करने की प्रक्रिया शुरु हो जाएगी। इस उड़ान के बाद एफओसी ब्लाक के बाकी 15 तेजस विमानों के उत्पादन का रास्ता साफ हो जाएगा। इन विमानों को अगले वित्तीय साल के भीतर सप्लाई करने की योजना है।

एलसीए का उत्पादन करने वाली हिंदुस्तान एरोनाटिक्स के एक अधिकारी के मुताबिक यह कामयाबी 17 मार्च को साढ़े 12 बजे मिली जब इसने 40 मिनट तक उड़ान भरी। एफओसी किस्म का यह पहला विमान बैंगलुरु स्थित हिंदुस्तान एरोनाटिक्स लि. के हवाई अड्डे से उड़ा कर देखा गया। इस विमान को HAL के चीफ टेस्ट पायलट एयर कमोडोर के ए मुथाना ने उड़ाया। HAL के चेयरमैन आर माधवन ने इस कामयाबी के बाद कहा कि इस परीक्षण उड़ान ने यह दिखाया है कि एलसीए के विभिन्न हितधारकों HAL, वायुसेना , वैमानिकी विकास एजेंसी , केमिलाक आदि के बीच अद्भुत समन्वय रहा। वैमानिकी संस्था केमिलैक द्वारा ड्राइंग एप्लीकेबिलीटी लिस्ट( डीएएल) और एसओपी जारी करने के रिकार्ड 12 महीने के भीतर हैल ने यह परीक्षण उड़ान पूरी की।

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