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इंटरव्यू: भारत में पहला राफेल 2019 तक उतरेगा- एरिक ट्रैपियर, चेयरमैन, Dassault Aviation

Rafale Fighter Plane & Eric Trappier

Dassault Aviation  चेयरमैन एरिक ट्रैपियर हाल ही में नागपुर के मिहान में Dassault Reliance Aerospace Limited (DRAL’s) की मैन्यूफैक्चरिंग फैसिलिटी के शिलान्यास के अवसर पर भारत के दौरे पर थे। DRAL से उत्पादन अगले साल 2018 में शुरू होने तथा भारत में पहला राफेल सन् 2019 में आने की उम्मीद है। अंग्रेजी अखबार द हिन्दू के पीयूष पांडे ने श्री ट्रैपियर से इस अवसर पर Dassault की भविष्य की योजनाओं के बारे में बात की। प्रस्तुत है बातचीत के संपादित अंशः





  • हम भारत में पहले राफेल के कब तक उतरने की उम्मीद कर सकते हैं?

जैसीकि हमने योजना बनाई है, पहले राफेल के 2019 में उतर जाने की उम्मीद है। सारा मामला पूरी तरह पटरी पर है।

  • ऑफसेट क्लॉज के हिस्से के रूप में भारत में कितने राफेल बनाये जाएंगे ?

सवाल यह नहीं है कि हमें मिले पहले 36 ऑर्डर में से कितने राफेल (जेट) बनाये जाएंगे। शुरू से ही राफेल और फाल्कन के कुछ हिस्से भारत में बनाये जाएंगे। हम एक-एक कदम आगे बढ़ाएंगे और इस फैसिलिटी में राफेल के हिस्सों को निर्माण करेंगे। भारत में मैन्यूफैक्चरिंग हमारा अगला कदम होगा और यह नए ऑर्डरों पर निर्भर करेगा। नए ऑर्डरों वाले राफेल का निर्माण पूरी तरह भारत में ही किया जाएगा।

  • आप 60,000 करोड़ रुपये में से 30,000 करोड़ रुपये की ऑफसेट प्रतिबद्धता को किस तरह पूरी करेंगे ?

भारत के साथ हमारे रणनीतिक संबंध बहुत पुराने हैं और हम पिछले 65 वर्षों से भारत को लगातार आपूर्ति कर रहे हैं। ऐसा हमारे एयरक्राफ्ट के कारण संभव हो पाया। हमारी सरकार ने भारत के साथ 50 प्रतिशत ऑफसेट प्रतिबद्धता के साथ 36 राफेल जेट की आपूर्ति के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किया है।

राफेल फाइटर प्लेन

राफेल फाइटर प्लेन (फाइल फोटो)

  • आपको यह भरोसा कैसे है कि आपको राफेल के लिए रिपीट ऑर्डर मिलेंगे ?

हममें यह क्षमता है कि हम यह साबित कर सकें कि हमारे फाइटर जेट अच्छे हैं। हममें यह भी क्षमता है कि हम भारत में ही एयरक्राफ्ट का निर्माण कर सकें। हमारा विश्वास है कि हमारे पास सरकार को रिपीट ऑर्डर के लिए भरोसा दिला सकने के पर्याप्त कारण हैं।

  • क्या रिलायंस के साथ साझीदारी का यह दायरा राफेल तक ही सीमित रहेगा ?

भारत में मैन्यूफैक्चरिंग आरंभ करने का यह अनोखा अवसर है। रिलायंस के साथ अपनी साझीदारी में हमारा इरादा अपने बिजनेस जेट फाल्कन के निर्माण का भी है। पहला फाल्कन भारत की जमीन से ही जल्द ही उड़ान भरेगा।

  • आपने रिलायंस समूह को जेवी साझीदारी के लिए क्यों चुना जिसका रक्षा क्षेत्र में पहले से कोई भी अनुभव नहीं है?

हम निजी क्षेत्र की एक ऐसी कंपनी के साथ शुरुआत कर रहे हैं जो वैश्विक कंपनी बनना चाहती है। मेरी कंपनी निजी कंपनी है, इसलिए यह समान साझीदारी है। हम अपनी 49 फीसदी हिसेदारी के लिए 100 मिलियन यूरो का निवेश कर रहे हैं।

  • यह संयुक्त उद्यम किस प्रकार के रोजगार अवसर पैदा करेगा ?

फ्रेंच एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के चेयरमैन के रूप में, मैं आने वाले महीनों के दौरान फ्रांस के एसएमई के एक बड़े प्रतिनिधिमंडल को लेकर यहां आउंगा। हमारी फैसिलिटी यहां 200 से अधिक SMEs को राफेल एवं फाल्कन जेट की कंपोनेंट एवं एवियोनिक्स मैन्यूफैक्चरिंग आवश्यकताओं की पूर्ति सुनिश्चित करेगी।

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