Air Force

वायुसेना का पहला AESA-रेडार युक्त जैगुआर तैयार

जैगुआर डारिन-3 विमान

नई दिल्ली। भारतीय वायुसेना का पहला एईएसए-रेडार युक्त लड़ाकू विमान तैयार हो गया है। देश के डीप पैनेट्रेशन जैगुआर विमानों में यह रेडार लगाया जा रहा है। एईएसए-रेडार युक्त पहला जैगुआर डारिन-3 विमान इस महीने ही उड़ान भरेगा। इससे जुड़े सभी तकनीकी परीक्षण पूरे हो चुके हैं। अब भारतीय वायुसेना अपने तेजस लड़ाकू विमान को भी इस रेडार से लैस करना चाहती है।





सामान्य रेडार में शत्रु के विमानों को टार्गेट करने के लिए एंटीना को हाथ से घुमाया जाता है। एईएसए-रेडार की बीम इलेक्ट्रॉनिक तकनीक से घूमती है। चूंकि यह बहुत तेज गति से चलती है, इसलिए यह रेडार एकसाथ कई लक्ष्यों पर नजर रख सकता है और शत्रु के कम्युनिकेशन और रेडार को जाम कर सकता है।

एक अंग्रेजी वेबसाइट के मुताबिक अभी तक भारतीय वायुसेना के किसी भी विमान में एईएसए-रेडार नहीं है। डारिन-3 जैगुआर विमानों पर इजरायली एल्टा रेडार लगाए जा रहे हैं। इस विमान में अगली पीढ़ी के हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर लगाए गए हैं। इनमें मिशन कंप्यूटर, इंजन और फ्लाइट इंस्ट्रूमेंट सिस्टम (ईएफआईएस), फायर कंट्रोल रेडार, जीपीएस युक्त अत्याधुनिक इनर्शियल नेवीगेशन सिस्टम और दूसरे कई तरह के उपकरण शामिल हैं।

सन 2012 में एल्टा ने भारत के 61 जैगुआर विमानों को अपग्रेड करने का काम हाथ में लिया था। इससे इन विमानों का ऑपरेशनल जीवन 20 साल बढ़ गया है। भारत का रक्षा अनुसंधान संगठन (डीआरडीओ) भी 6.7 करोड़ डॉलर की लागत से स्वदेशी एईएसए-रेडार विकसित कर रहा है। यह प्रोजेक्ट भी जनवरी 2012 में शुरू हुआ था और मई 2019 तक पूरा होने की आशा है। स्वदेशी एईएसए-रेडार तेजस मार्क-2 में लगाए जाएंगे।

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