Air Force

भारतीय वायुसेना में अभी 200 लड़ाकू विमानों की कमी

सुखोई लड़ाकू विमान

नई दिल्ली। वायुसेना प्रमुख बीएस धनोआ ने पिछले दिनों कहा था कि वायुसेना एक साथ दो-दो मोर्चों पर युद्ध लड़ने में सक्षम है पर हकीकत ये है कि लड़ाकू विमानों की भारी कमी तो है ही साथ-साथ बढ़ते हादसे चिंता का विषय है। फिलहाल वायुसेना को तकरीबन 200 लड़ाकू विमानों की जरूरत है।





जानकारों के मुताबिक वायुसेना का एक विमान हर महीने हादसे का शिकार हो रहा है। मिग के हादसे तो आम हो चुके थे लेकिन सुखोई विमानों के हादसों में भी इजाफा देखने को मिला है। वायुसेना के पास इन विमानों के ज्यादा थोड़ा ज्यादा है। वायुसेना के 42 में से सिर्फ 32 स्कवाड्रन ही इस वक्त क्रियाशील मोड में है। लगभग 10 खाली पड़ी है। एक स्क्वाड्रन में तकरीबन 20 विमान होते हैं इसलिए सीधे-सीधे दो सौ लड़ाकू विमानों की कमी है। नए विमानों की आपूर्ति में देरी की वजह से मिग और अन्य विमानों को हटाने की प्रक्रिया भी शुरू नहीं हो पा रही है।

सुखोई- 30 वायुसेना का अत्याधुनिक विमान 

दूसरी तरफ पुराने सुखोई लड़ाकू विमानों में भी तकनीकी दिक्कतें आनी शुरू हो गईं हैं जिसकी वजह से सेवा के समय उनकी मौजूदगी कम देखने को मिलती है। सुखोई- 30 भारतीय वायुसेना का सबसे आधुनिक विमान है लेकिन सौ सुखोई में महज 55 ही लड़ने की स्थिति में उपलब्ध रहते हैं। देखा जाए तो सुखोई की नई पीढ़ी के 272 लड़ाकू विमान खरीदे जाने हैं पर इनके अधिग्रहण एवं निर्माण प्रक्रिया में देरी हो रही है।

वायुसेना के पास सबसे ज्यादा लड़ाकू विमान मिग- 21 एवं मिग- 27 है। इनकी 14 स्क्वाड्रन हैं। लेकिन ये जर्जर हालात में हैं। वायुसेना के तय कार्यक्रम के मुताबिक 2014 में ही इसे वायुसेना से हटाना था लेकिन विमानों की कमी की वजह से इसे इस्तेमाल में लाया जा रहा है।

एयर चीफ मार्शल बीएस धनोआ ने हाल में कहा कि अगले कुछ वर्षों में 36 राफेल विमानों की आपूर्ति होनी है। उधर, 83 तेजस विमानों की खरीद के लिए प्रक्रिया आरम्भ की जाएगी।

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