Air Force

रूस से मिलकर 5वीं पीढ़ी का विमान बनाने की सलाह

5th जेनेरेशन लड़ाकू विमान

नई दिल्ली। रक्षा मंत्रालय द्वारा गठित एक उच्चस्तरीय समिति ने सलाह दी है कि भारत को रूस के साथ मिलकर पाँचवीं पीढ़ी के स्टैल्थ फाइटर विमान (एफजीएफए) का विकास और उत्पादन करना चाहिए।





इस सिलसिले में बनाई गई कमेटी ने यह सिफारिश ऐसे मौके पर की है, जब भारतीय वायुसेना इस प्रोजेक्ट पर कई तरह का आपत्तियाँ व्यक्त कर रही है। इस समिति के अध्यक्ष एयर मार्शल (रिटायर) सिंहकुट्टी वर्तमान हैं। उन्होंने दिल्ली के एक अंग्रेजी अखबार को बताया कि हमने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है।

समिति का कहना है कि भारत को इस परियोजना में रूस के साथ मिलकर काम करने से कई प्रकार के लाभ होंगे। खासतौर से उच्चस्तरीय तकनीक के हस्तांतरण का लाभ मिलेगा। भारत और रूस के बीच 4 अरब डॉलर के एफजीएफए प्रोजेक्ट पर अभी दस्तखत हुए नहीं हैं।

इस कार्य पर भारत अभी तक 1,500 करोड़ रुपये खर्च करके प्राथमिक डिजाइन का काम कर चुका है। यह काम 2013 में पूरा हो चुका है। भारत को भविष्य की जरूरतों को पूरा करने के लिए एडवांस्ड एवियॉनिक्स, स्मार्ट वैपंस, टॉपएंड मिशन कंप्यूटर्स और 360 डिग्री सिचुएशनलअवेयरनेस से संपन्न 120-130 स्विंग विंग रोल विमान चाहिए जिनके स्टैल्थ फीचर्स हों।

भारतीय वायुसेना को इस परियोजना में ऊँची लागत और तकनीकी हस्तांतरण को लेकर संदेह हैं। भारतीय सैन्य नीतिकारों को विश्वास है कि एफजीएफए प्रोजेक्ट भविष्य के स्वदेशी स्टैल्थ फाइटर या एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एएमसीए) को तैयार करने में मददगार होगा। पहला एएमसीए प्रोटोटाइप 10-12 साल में तैयार होने की आशा है।

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