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सीमा पर तैनात होंगे अपाचे कॉमबैट हेलिकॉप्टर

नई दिल्ली। पाकिस्तानी और चीनी सीमा पर अपनी ताकत बढ़ाने के इरादे से भारत अमेरिकी अपाचे अटैक हेलिकॉप्टरों को तैनात करने पर विचार कर रहा है। ये हेलिकॉप्टर पंजाब के पठानकोट और असम के जोरहाट में तैनात किए जा सकते हैं। रक्षा मंत्रालय ने सन 2015 में 22 अपाचे हेलिकॉप्टरों की खरीद के समझौते को स्वीकृति प्रदान की थी।





अब भारतीय वायुसेना पठानकोट और जोरहाट में अपाचे के दो स्क्वॉड्रन और तैनात करना चाहती है। वायुसेना के सूत्रों से बातचीत के आधार पर मेल टुडे ने लिखा है कि पठानकोट बेस में रूसी मूल के एमआई-35 अटैक हेलिकॉप्टरों का दस्ता पहले से तैनात है। इनका इस्तेमाल युद्ध होने की स्थिति में दुश्मन की इनफेंट्री और टैंक रेजिमेंट के खिलाफ भारतीय सेना को आगे बढ़ने में मदद करने में लिया जाएगा। जोरहाट में अटैक हेलिकॉप्टर पहली बार तैनात होंगे।

इन हेलिकॉप्टरों की डिलीवरी तक बेस पर जरूरी इंतजाम भी हो जाएंगे। इसके अलावा इन नए हेलिकॉप्टरों के लिए भारतीय पायलटों की ट्रेनिंग का काम भी पूरा हो रहा है। दोनों देशों के बीच हुए समझौते के अंतर्गत इनके संचालन दल की ट्रेनिंग भी शामिल है।

थलसेना ने की 11 अपाचे हेलिकॉप्टरों की मांग

भारतीय वायुसेना काफी लंबे अरसे से अटैक हेलिकॉप्टरों का संचालन करती आ रही है। अब थलसेना भी चाहती है कि उसके पास भी हवाई बेड़ा हो ताकि वह जमीनी ऑपरेशंस बेहतर तरीके से संचालित कर सके। इस सिलसिले में थलसेना ने नए ऑर्डर में 11 अपाचे हेलिकॉप्टरों की माँग की है। अपाचे के रूप में वायुसेना पहली बार शुद्ध हेलिकॉप्टर हासिल करने जा रही है।

वायुसेना का पास रूसी मूल के एमआई-25 और एमआई-35 हेलिकॉप्टरों के दो स्क्वॉड्रन पहले से हैं। इन्हें पाकिस्तान की सीमा पर लगाया गया है। अलबत्ता ये हेलिकॉप्टर सेवामुक्त होने वाले हैं। इन्हें केवल सैनिकों को ढोने के लिए बनाया गया है। जबकि लेजर और इंफ्रारेड सिस्टम से युक्त अपाचे हेलिकॉप्टर हर मौसम में और दिन-रात के ऑपरेशंस के लिए तैयार किए गए हैं। अपाचे में 70 मिमी के रॉकेट तथा ऑटोमेटिक तोप के अलावा हवा से हवा में मार करने वाली हैलफायर मिसाइल भी लगी है।

भारत को अगले कुछ वर्षों में मिल जाएंगे हेलिकॉप्टर

दो इंजन वाले अपाचे में दो पायलट बैठते हैं। इस हेलिकॉप्टर के आगे लगा गोलाकार लांगबो रेडार 256 चलते-फिरते टार्गेट को डिटेक्ट करके उनपर फौरन निशाना लगा सकता है। ये चॉपर अगले कुछ वर्षों में भारत को मिल जाएंगे। इनके साथ चिनूक-64डी हैवी लिफ्ट हेलिकॉप्टर भी भारत को मिलेंगे। ये हेलिकॉप्टर लद्दाख और पूर्वोत्तर के पहाड़ी इलाकों में भारी मशीनरी और सेना के लिए आवश्यक उपकरणों को लाने ले जाने का काम करेंगे।

भारत ने अपाचे और चिनूक हेलिकॉप्टरों के सौदे पर एकसाथ दस्तखत किए हैं। यह सौदा रूस और अमेरिका के साथ आठ साल लंबी चली टेंडरिंग प्रक्रिया के बाद पूरा हुआ है। चिनूक हेलिकॉप्टरों को चंडीगढ़ में तैनात करने की योजना है, जहाँ दुनिया के सबसे बड़े एमआई-26 हेलिकॉप्टर भी तैनात हैं। इन हेलिकॉप्टरों का अब बहुत कम इस्तेमाल होता है। इन्हें केवल स्पेशल मिशन के लिए ही इस्तेमाल किया जाता है।

इधर एचएएल स्वदेशी हल्के लड़ाकू हेलिकॉप्टरों (एलसीएच) के विकास का काम भी कर रहा है। यह हेलिकॉप्टर अपाचे के मुकाबले हल्के हेलिकॉप्टरों की कैटेगरी में आता है। एलसीएच को भी पश्चिमी और पूर्वोत्तर सेक्टरों में तैनात किया जाएगा। एचएएल ने एडवांस्ड लाइट हेलिकॉप्टर ध्रुव का सशस्त्र संस्करण रुद्र भी तैयार किया है। उसे पूर्वोत्तर के लिकाबली और पाकिस्तानी सीमा पर भटिंडा में तैनात किया जा रहा है।

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