DEFENCE

कैन्टोनमेंट बोर्ड को क्यों निकालना पड़ा कुत्तों व बंदरों को पकड़ने का टेंडर ?

बरेली। देश कि सीमाओं के रखवाले सीमा पर मिलने वाली चुनौतियों से तो परेशान हैं ही, आवारा कुत्तों और बंदरों के आतंक से भी परेशान हैं। यही नहीं देश को आकाशीय सुरक्षा प्रदान करने वाले आसमान के प्रहरी मरे हुए जानवरों की बदबू और सड़ांध से परेशान हैं। दरअसल सैन्य क्षेत्र में बंदर और कुत्तों का आतंक इतना बढ़ गया है कि कैंट बोर्ड ने कुत्तों और बंदरों को पकड़वाने के लिए टेंडर निकाला है।





ITBP व BSF कैम्प का बुरा हाल

एक अखबार के मुताबिक आईटीबीपी कैंप बुखारा और बीएसएफ कैंप भिठौरा का हाल कुछ ऐसा है कि यहां बंदरों ने जवानों व उनके परिवारों का जीना मुहाल किया हुआ है। दूसरी तरफ त्रिशूल एयरबेस से सटे गांवों में हो रहे अवैध कटान के कारण वायुसेना के साथ आम लोगों का भी बदबू और सड़ांध के कारण जीना मुश्किल हो गया है। जानकारी के मुताबिक शहर की 15 से अधिक कालोनियों और पुराने मोहल्लों में कुत्ते और बंदरों का  आतंक है। कुत्तों व बंदरों के आतंक से परेशान कैंट बोर्ड ने उन्हें पकड़वाने के लिए टेंडर निकाले हैं। सीईओ के लौवुम ने 12 फरवरी को शाम पांच बजे तक टेंडर मांगे हैं। 19 फरवरी को टेंडर खोले जाएंगे और इसके बाद कुत्ते बंदर पकड़वाने काम शुरू होगा।

चीन की सीमा के रखवालों को भी परेशान कर रहे बंदर

भारत तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) कैंप में भी बंदरों ने उत्पात मचा रखा है। बंदर जवानों और उनके बच्चों को काटने को दौड़ते हैं और घर के बाहर सूखे हुए कपड़े फाड़ डालते हैं। कई बार तो बंदर घर के अंदर घुसकर बच्चों को काट जाते हैं। भिठौरा (फतेहगंज पश्चिमी) के बीएसएफ कैंप में बंदरों का सबसे अधिक आतंक है। बंदरों के हमले का सबसे अधिक शिकार स्कूली बच्चों को होना पड़ता है।

हादसों का कारण बन सकते हैं मृत जानवरों के अवशेष 

राज्य सरकार की अवैध कटान पर रोक के बावजूद आलम यह है कि त्रिशूल एयरबेस से सटे गांवों में धड़ल्ले से अवैध कटान हो रहा है और मरे हुए जानवरों के शव एयरबेस की बाउंड्री के पास फेंक दिए जाते हैं। इनकी दुर्गन्ध से एयरफोर्स कैंपस साहित आस-पास की कालोनियों में रहने वाले लोग काफी परेशान हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार यहां सुबह से ही जानवरों के शवों पर पक्षी मंडराने लगते हैं, जो कभी भी हादसे का कारण बन सकते हैं। इसी तरह कुत्तों का आतंक भी लोगों को परेशान किये हुए है। कुत्तों के खूंखार होने की सबसे बड़ी वजह अवैध बूचड़खाने हैं। प्रशासन ने पिछले दिनों अवैध बूचड़खाने बंद कराए थे जो फिर चालू हो गए हैं।

डीएम राघवेंद्र विक्रम सिंह का कहना है कि आवारा कुत्ते और बंदरों से निपटने के लिए वन विभाग, नगर निगम और जिला पंचायत को लिखा जा रहा है। त्रिशूल एयरबेस के पास मरे हुए जानवर डालने वालों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी। नगर निगम, पुलिस, प्रशासन और एयरफोर्स की संयुक्त टीमें वहां पेट्रोलिंग करेंगी। अवैध कटान करने वालोंपर भी कड़ी कार्यवाही होगी।

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