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अर्ध सैनिक बलों के हितों की रक्षा करने वालों को ही मिलेगा वोट

OROP को लेकर धरना-प्रदर्शन

नई दिल्ली। अर्ध सैनिक बलों के परिवारों और उनके आश्रितों ने आज साफ-साफ कहा कि यदि सरकार हमारी मांगें नहीं मांगती है तो 2019 के आम चुनाव में उसी को वोट मिलेगा जो अर्ध सैनिकों बलों के हितों की बात करेगा।





अर्ध सैनिक बलों के सेवानिवृत्त सैनिक और अफसर संसद मार्ग पर अपनी मांगों को लेकर अपनी तीन दिवसीय भूख हड़ताल पर हैं। धरना-प्रदर्शन तथा भूख हड़ताल का आज पहला दिन है। आज की हड़ताल में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के रिटायर्ड आईजी रविंद्र तोमर भी शामिल हुए।

OROP को लेकर धरना-प्रदर्शन

उमस भरी गर्मी और नीम के पेड़ों के नीचे दरी पर बैठे प्रदर्शनकारी रोष में दिखे। यह भूख हड़ताल कंफेडेरेशन ऑफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्सेज वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा आयोजित की गई है। संगठन की मुख्य मांगे हैं- 7वें वेतन आयोग के सिफारिशों के आधार पर ‘वन रैंक- वन पेंशन’ लागू की जाए, मिलिट्री सर्विस- पे की तर्ज पर अर्ध सैनिक बलों के जवानों को भी पैरामिलिट्री सर्विस दी जाए, हर राज्य में केंद्रीय अर्ध सैनिक कल्याण बोर्ड की स्थापना, शहीद आश्रित को एक करोड़ का मुआवजा तथा परिवार के पुनर्वास की व्यवस्था, हर राज्य की तमाम जिलों में CGHS  डिस्पेंसरी खोली जाएं।

सेवानिवृत्त सैनिकों का धरना-प्रदर्शन

संगठन के कोषाध्यक्ष वीएस कदम ने बताया कि आज दिल्ली समेत उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा तथा केरल के अर्ध सैनिक बल के सदस्यों ने हिस्सा लिया है। अगले दो दिनों में देश के अन्य राज्यों के गांव कस्बों से प्रतिनिधि हिस्सा लेने आ रहे हैं।

संगठन के जनरल सेक्रेटरी रनबीर सिंह का कहना है कि अगर सरकार ने 30 नवंबर तक अर्ध सैनिक बलों की जायज मांगों के बारे में ऐलान नहीं किया तो फिर से 13 दिसंबर, 2018 को धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। साथ ही उसी दिन इस बात का ऐलान किया जाएगा कि वोट उसी को मिलेगा जो अर्ध सैनिक बलों के हितों की बात करेगा।

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