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हजारों नम आंखों ने दी नायक की तरह शहीद मेजर कौस्तुभ राणे को अंतिम विदाई

मेजर की पत्नी कनिका

मुंबई। मेजर कौस्तुभ प्रकाश राणे सही मायनों में नायक थे। सिर्फ मीरा रोड के आसपास के लोगों के ही नहीं समूचे देश के। और आज (गुरुवार) उन्हें अंतिम विदाई भी नायक की तरह दी गई। जिस रास्ते से उनकी अंतिम यात्रा निकली वह पीले फूलों से पटा पड़ा था। मानो उस पुष्प की अभिलाषा भी पूरी हो गई जो कहता है-





‘…मुझे तोड़ लेना वनमाली

उस पथ पर देना तुम फेंक

मातृभूमि पर शीश चढ़ाने

जिस पथ पर जावें वीर अनेक’ (एक पुष्प की अभिलाषा, रचयिताः माखन लाल चतुर्वेदी)

मेजर कौस्तुभ प्रकाश राणे

दो दिन पहले मंगलवार को जम्मू-कश्मीर के बांदीपोरा में आतंकियों को ललकारते हुए शहीद हुए। मेजर कौस्तुभ प्रकाश राणे बेहद बहादुर थे। मीरा रोड के निवासी उनकी निर्भीकता के किस्से बताते मिल जाएंगे। इसी वर्ष उन्हें 26 जनवरी को सेना वीरता पदक से सम्मानित किया गया था। और इसी वर्ष उन्हें प्रमोशन भी मिला था। उन्हें कैप्टन से मेजर बनाया गया था।

स्वभाव से शर्मीले लेकिन अपने लक्ष्य के प्रति कटिबद्ध मेजर कौस्तुभ के बारे में उनकी पड़ोसी एक अखबार के साथ बातचीत में कहती हैं, देश के प्रति कुछ करने का जज्बा उनमें बचपन से था। छोटी सी उम्र में ही उन्होंने सेना में जाने का तय कर लिया था।

इकलौते पुत्र के बारे में पिता प्रकाश राणे को गर्व है कि उनका बेटा देश के लिए लड़ते हुए शहीद हुआ। राणे परिवार मूलतः कोंकण के वैभववाड़ी का रहने वाला है लेकिन मेजर कौस्तुभ मुंबई-ठाणे में पले बढ़े। राणे परिवार बरसों पहले यहां आ गया था। उनके पिता प्रकाश राणे एक प्राइवेट कंपनी से रिटायर हुए हैं और मां ज्योति राणे एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ाती थीं। उम्र के इस पड़ाव पर माता-पिता को अब इस दुख का सामना करना होगा, उससे उबरना होगा। ढाई वर्ष के बेटे का लालन-पालन अब उनकी पत्नी कनिका को करना होगा।

 

29 वर्षीय मेजर कौस्तुभ सेना में वर्ष 2008 में लेफ्टिनेंट के पद पर भर्ती हुए थे। वर्ष 2011 में वह कैप्टन बने और इसी वर्ष वह मेजर बने।

गुरुवार को हजारों लोगों की उपस्थिति में ‘मेजर कौस्तुभ राणे अमर रहे’, ‘भारत माता की जय’ और ‘वंदे मातरम’ के नारों के बीच सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया।

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