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कैदी का कौशल, अब कैदियों के परिजनों को जेल आने की जरूरत नहीं..

जेल

चंडीगढ़। अकसर आप सुनते होंगे जेल प्रशासन के नाक नीचे से निकल भागा कैदी। जेल की दीवारों में कैदियों ने लगाई सेंध। लेकिन हम यहां एक ऐसे कैदी के बारे में बताने जा रहे है जिसने ऐसा सॉफ्टवेयर विकसित किया जिससे कैदियों के परिजनों की मुश्किलें कम हो जाएगी। कैदी द्वारा बनाए गए सॉफ्टवेयर से जींद जिला कारागार देश की पहली कैशलेस जेल बन गई है। ऑनलाइन ट्रांजेक्शन सुविधा शुरू होने के बाद कैंटीन खर्च के लिए पैसा जमा करवाने के लिए कैदियों के परिजनों को अब जेल आने की आवश्यकता नहीं हैं। इस सॉफ्टवेयर का निर्माण जेल अधीक्षक हरेंद्र श्योराण ने गुरुग्राम जेल के कैदी सॉफ्टवेयर इंजीनियर अमित मिश्रा की मदद से किया है। उन्होंने कहा कि दिसंबर तक प्रदेश की सभी जेलों में यह सुविधा आरंभ करने का टारगेट है। जेल प्रशासन ने इंटरनल फिनिक्स सॉफ्टवेयर को HDFC बैंक के साथ जोड़ दिया है।





सॉफ्टवेयर में दर्ज रहेगी कैदी की सारी जानकारी

जेल अधीक्षक ने कहा कि जींद जेल को कैशलेस बना दिया गया है। जेल से रिहा होने के बाद अमित मिश्रा की मदद से जींद जेल व राज्य के जेल प्रशासन को मुफ्त में यह सुविधा उपलब्ध करवाई गई। इस सॉफ्टवेयर में कैदियों का पूरा डिटेल दर्ज है और उनके अंगूठों के निशान दर्ज हैं। इसी के जरिए वे कैंटीन से सामान की खरीदारी कर सकते हैं।अंगूठा लगाते ही कैदी का कैंटीन से जुड़ा पूरा रिकॉर्ड स्क्रीन पर आ जाएगा। जैसे, उसके एकाउंट में कितने पैसे थे और उसने कितने रुपये की खरीदारी की है। कैदी बकाया राशि की डिटेल भी हासिल कर सकता है।

जेल अधीक्षक के मुताबिक ऑनलाइन सुविधा में पैसे जमा कराने की लिमिट है और एक महीने में 6,000 रुपये से अधिक पैसा जमा नहीं होगा। अगर कोई दूसरा व्यक्ति भी उस कैदी के खाते में पैसा जमा करवाना चाहेगा तो भी सॉफ्टवेयर द्वारा आगे की प्रक्रिया पर कंप्यूटर कार्य नहीं करेगा।

कैदी वेलफेयर फंड से आएगा पैसा

हरेंद्र श्योराण ने कहा कि जेल प्रशासन ने कैदी वेलफेयर फंड के खाते को ही फिनिक्स के साथ कनेक्ट किया है। यह खाता HDFC बैंक में है। इसी खाते के जरिए कैदियों के खाते में पैसा ट्रांसफर होगा। दूसरी तरफ जो भी संबंधित व्यक्ति किसी कैदी के खाते में पैसा जमा करवाना चाहता है तो उसे जेल की वेबसाइट पर जाना होगा। वहां पैसा जमा करवाने का विकल्प दिखेगा। इस पर क्लिक करते ही संबंधित कैदी का नंबर दर्ज करना होगा। इसके बाद आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर OTP आएगा। वह कंप्यूटर में दर्ज करते ही कैदी का प्रोफाइल सामने होगा और फिर पैसा कैदी के लिए जमा हो जाएगा।

 

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