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खास रिपोर्ट: उज्‍बेकिस्‍तान से सामरिक रिश्ते और गहरे होंगे

उज्‍बेकिस्‍तान के राष्‍ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव
उज्‍बेकिस्‍तान के राष्‍ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव और पीएम मोदी

नई दिल्‍ली। उज्‍बेकिस्‍तान के राष्‍ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव अपने पहले सरकारी दौरे पर अगले सप्ताह भारत आने वाले हैं। इस दौरान भारत औऱ उज्बेकिस्तान के बीच आर्थिक व सामरिक रिश्ते और गहराई लेने के कई मसलों पर बातचीत होगी।





यहां उज्बेकिस्तान के राजदूत फरहोद अर्जेव ने राष्ट्रपति शौकत के भारत दौरे की जानकारी देते हुए कहा कि यह यात्रा भारतीय-उज्‍बेकिस्‍तान रिश्‍तों में एक नये अध्‍याय की शुरूआत है । यह रिश्ता पारस्‍परिक रूप से समृद्ध रहा है और ये संबंध पिछले कुछ वर्षों में मजबूत हुए है। इसके कारण दोनों पक्षों के बीच कई कई उच्‍च स्‍तरीय, बहु-क्षेत्रीय प्रतिनिधियों का आदान प्रदान हुआ है और इस गौरवपूर्ण शिखर बैठक का मार्ग प्रशस्‍त हुआ है। इस दौरे में कई अनुबंध एवं समझौते पर हस्‍ताक्षर होने की संभावना है, जो इन दोनों देशों के बीच व्‍यापारिक संबंधों को बढ़ावा देंगे। दोनों देशों के बीच पिछले साल साढ़े 13 करोड़ ड़ालर का आपसी व्यापार हुआ था। राष्ट्रपति शौकत अपने दौरे में भारत से आर्थिक व व्यापारिक रिश्तों को और गहरा करने के लिये भारतीय व्यापार संगठनों के साथ भी बैठक करेंगे।
पिछले दो वर्षों में उज्‍बेकिस्‍तान ने महत्‍वपूर्ण राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक सुधारों पर काफी प्रगति की है। मध्‍य एशिया की प्रमुख ताकत के रूप में इन केन्द्रित प्रयासों ने एक सुदृढ़ बाजार अर्थव्‍यवस्‍था प्राप्‍त करने के उज्‍बेकिस्‍तान के लक्ष्‍य को ताकत दी है। उज्बेकिस्तान मध्य़ एशिया का एक महत्वपूर्ण देश है जिसके साथ रिश्ते गहरे करने पर हाल केसालों में भारत विशेष ध्यान देता रहा है। भारत और उज्बेकिस्तान के नेता आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में आपसी सहयोग गहरा करने का दायरा और बढ़ाने पर बात करेंगे।

इस पूर्वानुमानित यात्रा के दौरान उच्चस्तरीय उज्‍बेक प्रतिनिधिमंडल का शुभागमन हो रहा है जिसमें उज्बेकिस्तान के सिनेटर्स और रिजनल गवर्नर्स के अलावा इंवेस्‍टमेंट कमिटी, टुरिज्‍म कमिटी के राजप्रमुख, व्यापार, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, सूचना प्रौद्योगिकी और नवाचार के मंत्रीगण सम्मिलित हैं. इस प्रतिनिधि मंडल में तेल एवं गैस, एनर्जी, केमिकल्‍स, एयरलाइंस, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रिक इक्विपमेंट, एग्रीकल्‍चर, फूड प्रोडक्‍शन और टेक्‍सटाइल्‍स व अन्‍य जैसे उद्योंगे की एजेंसियां भी शामिल होंगी।

राष्‍ट्रपति मिर्जियोयेव व्यापार, आर्थिक और वित्तीय निवेशों, नवाचार एवं मानवीय प्रयासों में भारतीय-उज्‍बेकिस्‍तान सहयोगों पर चर्चा भी करेंगे। इन चर्चाओं से सूचना प्रौद्योगिकी, मेडिसिन, फॉर्मास्‍युटिकल्‍स और टुरिज्‍म के क्षेत्रों में रिपब्लिक ऑफ उज्‍बेकिस्‍तान की संभावित परियोजनाओं को मदद भी मिलेगी।

आगामी विदेश दौरे के बारे में बताते हुये भारत में उज्‍बेकिस्‍तान के राजदूत फरहोद आर्जिव ने कहा कि अगले सप्‍ताह में कई तरह के कार्यक्रम शुरू किये जायेंगे, जो सभी सेक्‍टर्स में भारतीय-उज्‍बेकिस्‍तान साझेदारी को बढ़ावा देंगे। उन्‍होंने आगे बताया कि उज्‍बेकिस्‍तान-भारत संबंध की जड़ें इतिहास एवं संस्‍कृति में रसी-बसी हैं। यह साझा विरासत दो देशों के बीच एक स्‍मृद्ध भविष्‍य का आधार है। उज्‍बेकिस्‍तान के राष्‍ट्रपति की भारत में आगामी विदेश यात्रा के दौरान राजनीतिक और अर्थिक क्षेत्रों में कई उच्‍च-स्‍तरीय बैठकें होंगीं और साथ ही विभिन्‍न क्षेत्रों में एक सुदृढ़ द्विपक्षीय संबंधों की एक नई शुरूआत भी होगी।

भारत-उज्‍बेकिस्‍तान संबंध ने कई महत्वपूर्ण भारतीय निवेश के रास्‍ते खोले हैं, जिसमें मिंडा ग्रुप द्वारा यूजेडमिंडा जेवी शामिल हैं, जिसके द्वारा वर्ष 2011 से नवोइ फ्री इकोनॉमिक जोन में स्‍पेयर ऑटोमोबाइल पार्ट्स का निर्माण किया जाता है। इसके अलावा इसमें वर्ष 2011 से टर्मेज में नोवा फार्मा और ‘द रामदा होटल’ शामिल हैं, जिसका परिचालन वर्ष 2009 से ताशकंद के राजधानी शहर में हो रहा है। वर्तमान में कुल 139 कंपनियां भारतीय राजधानी की प्रतिभागिता के साथ उज्‍बेकिस्‍तान में मौजूद हैं। उज्‍बेकिस्‍तान में भारतीय कंपनियाँ विभिन्‍न क्षेत्रों में परिचालन करती हैं, जिनमें होलसेल, रिटेल और पेट्रोलियम, केमिकल्‍स टेक्‍सटाइल्‍स, लेदर, एग्रीकल्‍चर, कंस्‍ट्रक्‍शन और सर्विस इंडस्‍ट्रीज में‍ निर्माण शामिल हैं।

पिछले छह महीनों में दोनों देशों के बीच ट्रेड टर्नओवर 135 मिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है और एक भावी इंडो-उज्‍बेक आर्थिक संबंध का फार्मास्‍युटिकल्‍स, आइटी, टुरिज्‍म, हेल्‍थकेयर और इनोवेशन्‍स व अनेक दूसरे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण संभावना का विकास होगा।

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