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स्पेशल रिपोर्ट: परमाणु हमले की धमकी देने वाली शिरीन मजारी पाक रक्षा मंत्री बनीं तो औऱ बढ़ेगा टकराव

शिरीन मजारी

नई दिल्ली। पाकिस्तान के भावी  प्रधानमंत्री इमरान खान के कैबिनेट में वित्त, विदेश औऱ रक्षा मंत्रालय जैसे महकमे किसे मिलेंगे इसे लेकर अटकलों का बाजार पाकिस्तान के राजनीतिक हलकों औऱ मीडिया में काफी गर्म चल रहा है लेकिन जो नाम सबसे चर्चित है वह शिरीन मजारी का।





अटकलें हैं कि घोर भारत विरोधी शिरीन मजारी को पाकिस्तान की रक्षा मंत्री बनाया जा सकता है। इसे लेकर भारत के सामरिक हलकों में इन आशंकओं को बल मिलने लगा है कि पाकिस्तान की सेना ऐसे कट्टरपंथी व भारत विरोधी नेताओं को पाकिस्तान की सेनाओं की जिम्मेदारी सौंप कर अपना एजेंडा आसानी से पूरा कर सकेगी।

शिरीन मजारी की घोर भारत विरोधी मानसिकता इस बात से उजागर होती है कि उन्होंने खुलकर यह धमकी दी है कि भारत को परमाणु हमलों से तबाह कर देना चाहिये औऱ इसके लिये उन्होंने पाकिस्तान की नई समर नीति का प्रतिपादन भी किया है। पाकिस्तान के रक्षा जर्नलों में प्रकाशित लेखों में शिरीन मजारी ने अपनी सिफारिशों में कहा है कि भारत के साथ युद्ध हुआ तो भारत के किन शहरों को और बड़े शहरों में किन ठिकानों को पाकिस्तानी परमाणु मिसाइलों का निशाना बनाया जा सकता है।

शिरीन मजारी इस्लामाबाद स्थित पाकिस्तान की अग्रणी सामरिक विद्वान मानी जाती हैं और परमाणु हमले की रणनीति पाकिस्तान के रक्षा जर्नलों में अपने लेखों के जरिये बताती रही हैं। उनके ये विचार नब्बे के दशक से ही उजागर होने शुरू हुए जब विभिन्न जर्नलों में उन्होंने पाकिस्तान की परमाणु अवधारणा के बारे में लेख लिख कर अपनी सिफारिशें दी कि भारत के किन शहरों को निशाना बनाया जाना चाहिये। शिरीन मजारी द्वारा सुझाए गए इन लेखों में यह कहा गया है कि पंजाब के सिखों और पश्चिम बंगाल को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिये क्योंकि पंजाब के सिख पाकिस्तान के दोस्त बन सकते हैं और पश्चिम बंगाल पर परमाणु बम गिरने से बांग्लादेश को भी इस वजह से भारी तबाही झेलनी पड़ेगी।

भारत के साथ युद्ध की स्थिति में शिरीन मजारी का सुझाव है कि भारत के साथ पारम्परिक हथियारों  की लड़ाई में उलझने की जरूरत नहीं है क्योंकि पाकिस्तान के पास समुचित क्षमता नहीं है इसलिये भारत के साथ युद्ध की हालत में पाकिस्तान को अपनी परमाणु मिसाइलों का ही सीधा इस्तेमाल करना चाहिये।

इसी के मद्देनजर शिरीन मजारी ने सुझाव दिया था कि पाकिस्तान को कभी भी पहले परमाणु हमला नहीं करने का वचन अंतरराष्ट्रीय समुदाय को नहीं देना चाहिये। शिरीन के इन्हीं आक्रामक विचारों की वजह से वह पाकिस्तान की खुफिया एजेंसियों की डार्लिग बन गईं। पाकिस्तान के चुनावों में सबसे अधिक सीटें जीतने वाली पार्टी पीटीआई के नेता इमरान खान के साथ भी उनके अच्छे ताल्लुकात रहे हैं इसलिये इन अटकलों को बल मिला है कि शिरीन मजारी को सैन्य नेतृत्व और आईएसआई के साथ राजनीतिक नेतृत्व का भी भारी समर्थन मिलेगा।

मजारी के भारत विरोधी उग्र विचारों की वजह से ही भारत के सामरिक हलकों में भारी चिंता है कि पाकिस्तान भारत के खिलाफ और उग्र नीतियां अपनाएगा जिससे भारत के लिये मुश्किलें बढेंगी। कहते हैं कि शिरीन मजारी के उग्र विचारों से पाकिस्तान के तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल परवेज मुशर्ऱफ ने  प्रेरणा ले कर ही 1999 में करगिल में घुसपैठ कर इसे एक बड़े संघर्ष में बदल दिया था।

पाकिस्तान के सत्ता तंत्र में शिरीन मजारी के ऊपर चढ़ने की सम्भावनाओं से इस बात की शंका भारतीय सामरिक हलकों में जाहिर की जा रही है कि इमरान खान जम्मू-कश्मीर मसले को अपने कार्यकाल में और गर्म बनाएंगे जिससे भारत औऱ पाकिस्तान के बीच तनाव और टकराव और बढ़ेगा।

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