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स्पेशल रिपोर्ट: ऐसे मुमकिन हो सकी कैलाश मानसरोवर की यात्रा केवल एक सप्ताह में

कैलाश मानसरोवर
फाइल फोटो

नई दिल्ली। तिब्बत में कैलाश मानसरोवर की यात्रा अब केवल एक सप्ताह के भीतर हो सकेगी। पहले इसमें दो से तीन सप्ताह लगता था। उत्तराखंड में धारचुला और चीनी सीमा पर लिपुलेख तक 80 किलोमीटर की सड़क बन जाने से यह मुमकिन हो सका है।





रक्षा राज्य मंत्री राजनाथ सिंह ने इस सड़क मार्ग का शुक्रवार को उद्घाटन किया। इसके साथ ही उन्होंने पिथौरागढ़ से गुंजी तक वाहनों के एक काफिले को वीडियो के जरिये हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस सडक का निर्माण रक्षा मंत्रालय के तहत सीमा सडक संगठन (BRO) ने किया है। इस अवसर पर राजनाथ सिंह ने कहा कि सीमांत व सुदूर इलाकों के विकास के लिये केन्द्र सरकार औऱ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विशेष लक्ष्य तय किया है। उन्होंने कहा कि इस सड़क मार्ग के बन जाने से इस इलाके के लोगों और तीर्थयात्रियों की बहुत पुरानी आकांक्षा पूरी हुई है। उन्होंने भरोसा जाहिर किया कि इस सड़क के बन जाने के बाद क्षेत्र में व्यापार और आर्थिक गतिविधियों को भारी बढावा मिलेगा।

रक्षा मंत्री ने कहा कि कैलाश मानसरोवर की तीर्थ यात्रा हिदुंओं ,जैनों और बौद्धों में काफी पवित्र मानी जाती रही है । यह यात्रा अब केवल एक सप्ताह में पूरी हो सकेगी। पहले इसमें 02 से 03 सप्ताह लगते थे। यह स़डक घटियाबाघड से शुरू होती है औऱ लिपुलेख दर्रा पर जा कर समाप्त होती है। यह कैलाश मानसरोवर का प्रवेश द्वार माना जाता है।

80 किलोमीटर की यह सड़क कहीं पर छह हजार फीट उंची है तो कहीं पर 17,060 फीट ऊंची है। इस सडक के बन जाने से अत्यधिक दुर्गम पैदल मार्गों से जाना बंद हो जाएगा। लिपुलेख के रास्ते 90 किलोमीटर पैदल चलना होता था। इससे बुजुर्ग यात्रियों को काफी परेशानी होती थी। कैलास मानसरोवर जाने के लिये लोग नेपाल औऱ सिक्किम का मार्ग भी चुनते रहे हैं। इसमें भारतीय सड़कों से करीब 20 प्रतिशत और चीनी इलाकों से 80 प्रतिशत जमीनी मार्ग से जाना होता है। घटियाबागढ़ लिपुलेख रास्ता खुल जाने से यह अनुपात पलट गया है। अब पूरी यात्रा का 84 प्रतिशत भारतीय सड़कों से और 16 प्रतिशत यात्रा चीनी सडकों से होगी।

इस सडक को बनाने की असाधारण उपलब्धि के लिये सीमा सडक संगठन को बधाई देते हुए उन्होंने सडक निर्माण के दोरान कर्मियों की मौत पर शोक भी जाहिर किया। उन्होंने कहा कि गढवाल औऱ कुमाउं इलाके के विकास में सीमा सड़क संगठन अहम भुमिका निभा रहा है। अत्यधिक दुर्गम इलाका होने की वजह से इस सड़क को बनाने में काफी तकनीकी तिक्कतों का सामना करना पड़ा।

इस सड़क के उद्घाटन के मोके पर प्रधान सेनापति जनरल बिपिन रावत , थलसेना प्रमुख जनरल मुकुंद नरवाणे और रक्षा सचिव अजय कुमार और अन्य आला अधिकारी मौजूद थे।

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