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स्पेशल रिपोर्ट: रक्षा सहयोग का दायरा बढ़ाएंगे इंडोनेशिया और भारत

पीएम मोदी

नई दिल्ली।  भारत और इंडोनेशिया रक्षा क्षेत्र में आपसी सहयोग को औऱ गहरा करने के नये उपायों पर विचार कर रहे हैं। इस बारे में यहां दोनों देशों की संयुक्त रक्षा समिति की बैठक दोनों देशों के रक्षा सचिवों की सहअध्यक्षता में हुई। इस बारे में जानकारी देते हुए यहां इंडोनेशिया के राजदूत सिद्धार्तों सूर्योदिपूरो ने एक बातचीत में कहा कि दोनों देशों की सेनाओं के बीच आपसी तालमेल बढ़ाने के नये उपायों पर चर्चा की जा रही है। दोनों देशों की सेनाओं के बीच सहयोग का दायरा बढ़ाया जाएगा।





नौसेनाओं के बीच पहली बार होगा साझा नौसैनिक अभ्यास

दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच पहली बार साझा नौसैनिक अभ्यास होगा। हालांकि दोनों देशों की नौसेनाएं दोनों देशों के साझा समुद्री इलाके में तालमेल से गश्त कर रही हैं। दोनों देश अब यह भी सोच रहे हैं कि इस समन्वित गश्त का दायरा भी किस तरह औऱ बढाया जाए। नौसेना के अलावा दोनों देशों की वायुसेना औऱ थलसेना के बीच भी साझा अभ्यास का सिलसिला शुरू करने के प्रस्ताव पर विचार चल रहा है।

गौरतलब है कि दो महीने पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के इंडोनेशिया दौरे में रक्षा व सामरिक सहयोग गहरा करने के मसले पर सहमतियां बनी थीं। खासकर इंडोनेशिया के साबांग बंदरगाह के विकास में भारत के सहयोग औऱ वहां भारतीय नौसैनिक पोतों को ठहरने की मंजूरी के बारे में भी सहमति बनी थी।

अंडमान और साबांग द्वीप के बीच बढ़ाएंगे तालमेल

दोनों देश अब तय कर रहे हैं कि अंडमान और साबांग द्वीप के बीच किस तरह तालमेल बढ़ाया जाए। साबांग दवीप पर नई ढांचागत सुविधा विकसित करने के बारे में भी बातचीत चल रही है। राजदूत सिद्धार्तो ने यहां इंडियन एसोसियशन आफ फारेन अफेयर्स कारेसपोंडेंट्स(आईएएफएसी) के साथ एक बैठक में कहा कि दोनों देश अब यह चर्चा कर रहे हैं कि भारत औऱ इंडोनेशिया के बीच किस तरह सागरीय सहयोग को नया अर्थ दिया जाए।

एक-दूसरे के सैनिकों को ट्रेनिंग मुहैया कराने पर भी विचार

राजदूत ने कहा कि प्रशांत इलाके पर भारत औऱ इंडोनेशिया के विचारों में अब समानता बन रही है जो कि पहले नहीं थी। अब दोनों देश हिंद प्रशांत इलाके को समान नजरिये से देख रहे हैं। हिंद प्रशांत इलाके पर भारत के विचार इंडोनेशिया से काफी मेल खाते हैं। हम अब इसके लिये जमीनी प्रक्रियाएं पूरी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि फिलहाल हम एक-दूसरे पर आपसी भरोसा पैदा करने की प्रक्रिया में हैं। हम यह भी देख रहे हैं कि किस तरह हम सूचनाओं का आदान-प्रदान बढ़ाएं। दोनों देशों की सैन्य सुविधाओं में एक दूसरे के सैनिकों को ट्रेनिंग मुहैया कराने पर भी हम विचार कर रहे हैं।

कृत्रिम तरीके से विस्तार कर विशेष आर्थिक क्षेत्र का दावा सही नहीं

दक्षिण चीन सागर के इलाके में चीन की गतिविधियों के बारे में राजदूत ने कहा कि इसका प्रबंधन अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों के अनुरूप ही होना चाहिये। इस बारे में दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के संगठन आसियान और चीन के बीच एक आचार संहिता पर बातचीत फिर शुरू की गई है। उन्होंने कहा कि किसी भी समुद्री आकार को कृत्रिम तरीके से विस्तार कर उसके आघार पर विशेष आर्थिक क्षेत्र का दावा नहीं किया जा सकता। गौरतलब है कि चीन ने इंडोनेशिया के समुद्री इलाके पर भी अपना प्रादेशिक अधिकार जताया है लेकिन इंडोनेशिया ने इसे खारिज करते हुए कहा है कि एक अंतरराष्ट्रीय ट्राइबुनल ने इस पर इंडोनेशिया का दावा सही माना है।

राजदूत ने कहा कि भारत औऱ इंडोनेशिया के बीच दिवपक्षीय राजनयिक रिश्तों की स्थापना की 70 वीं सालगिरह अगले साल मनाई जाएगी। आपसी रिश्तों को गहरा करने के लिये दोनों देशों के बीच जनता स्तर पर सम्पर्क गहरा करने पर भी काम चल रहा है।

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