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स्पेशल रिपोर्ट: पोतों की आवाजाही पर भारत की नजर अब पैनी होगी

नौसेना अधिकारी दस्तखत करते हुए

नई दिल्ली। हिंद महासागर से होकर गुजरने वाले पोतों के बारे में भारत को अब तुरंत जानकारी मिल सकेगी। यह उस संधि के जरिए मुमकिन होगी जिस पर भारत ने इसी सोमवार को दस्तखत किए हैं। फिलहाल इटली की अगुवाई में संचालित हो रही इस संधि के 30 सदस्य देश हैं।





इस संधि के सदस्य देशों के सहयोग से भारत के समुद्री इलाके में संदिग्ध नौवहन गतिविधियों पर अब भारत की बेहतर नजर जा सकेगी। इस संधि का नाम है एसेन्सन एग्रीमेंट टू ट्रांस रीजनल मेरीटाइम फ्रेमवर्क (T- RMN)। भारत ने इसके पहले 36 देशों के साथ पहले ही व्हाइट शिपिंग समझौता किया हुआ है जिससे भारत को व्यापारिक पोतों की हिंद महासागर के रास्ते आवाजाही की जानकारी मिलती है। पोतों के संदिग्ध पाए जाने पर भारत उसका औचक निरीक्षण कर सकता है।

यहां नौसेना के प्रवक्ता कैप्टन डीके शर्मा ने बताया कि इटली की राजधानी रोम में भारतीय नौसेना की और से कमाडोर के एम रामाकृष्णन ने संधि पर दस्तखत किए। इस के जरिए भारत को अपने समुद्री इलाके में पोतों की आवाजाही के बारे में जो जानकारी मिलेगी उससे भारतीय सुरक्षा बलों को संदिग्ध पोतों पर नजर रखने में मदद मिलेगी। गौरतलब है कि हिंद महासागर भारत का आंगन कहा जाता है और इस इलाके में समुद्री सुरक्षा और स्थिरता को बनाए रखने में भारत नेतृत्वकारी भूमिका निभा रहा है। इस इलाके में समुद्री डाकुओं का बोलबाला खत्म करने में भारतीय नौसेना ने अहम भूमिका निभाई है। भारतीय नौसैनिक अधिकारी इस संधि में भारत को शामिल किए जाने को काफी अहम बता रहे हैं। इस संधि में भारत को शामिल कर अंतर्राष्ट्रीय समुदाय ने समुद्री सुरक्षा बनाए रखने में भारत की भूमिका को मान्यता दी है।

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