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Special Report: कोविड के बीच आर्थिक कूटनीति गहरा कर रहा है भारत

कोरोना वायरस
फाइल फोटो

नई दिल्ली। कोविड महामारी से पैदा संकट को भारत एक  नया अवसर और सकारात्मक चुनौती के रुप में ले रहा है। पिछले पांच सालों  के भीतर भारत ने 60 देशों को तीन सौ  परियोजनाओं के लिये 30 अरब डालर के लाइन आफ क्रेडिट मुहैया कराएं हैं। इसमें से आधी परियोजनाएं भारत के पडोसी देशों के लिये हैं जब कि मध्य एशिया औऱ अफ्रीकी देशों के साथ भी भारत आर्थिक सहयोग को गहरा कर रहा है।





भारत को आत्मनिर्भर बनाने में आर्थिक कूटनीति पर  वाणिज्य संगठन पीएचडी चैम्बर द्वारा आयोजित एक सेमिनार को सम्बोधित करते हुए विदेश मंत्रालय में आर्थिक सम्बन्ध विभाग के सचिव राहुल छाबडा ने कहा कि हाल में भारत ने  हाल में अफ्रीकी देश घाना में  राष्ट्रपति  महल, गाम्बिया में राष्ट्रीय संसद भवन  औऱ नाइजीरिया में क्रिकेट स्टेडियम बनाए हैं। भारत के साथ आर्थिक सम्बन्धों को गहरा करने के लिये विदेशों में भारतीय दूतावासों को सक्रियता दिखाने को कहा  गया है। भारतीय दूतावास निर्यात संवर्द्धन परिषद और निर्यातकों के संगठन फीयो के साथ  तालमेल बनाया है औऱ इसके अलावा भारतीय दूतावासों ने इंडिया ट्रेड पोर्टल लांच किये हैं।  15 ऐसे देशों की पहचान की गई है कि जहां कृषि उत्पादों का निर्यात किया जा सकता है। छाबडा ने कहा कि केवल एक देश पर सप्लाई चेन के लिये  अत्यधिक निर्भरता की स्थिति अब खत्म होगी।

 विदेश मंत्रालय के आला अधिकारी ने बताया कि  भारत और फ्रांस द्वरा साझा तोर पर प्रवर्तित अंतरराष्ट्रीय सौर गठजोड ( ISA)   की सदस्यता अब दुनिया के किसी भी देश के लिये खोला जाएगी। अब तक वही देश इसके सदस्य बन सकते थे जो ट्रापिक आफ कैंसर और कैप्रीकोर्न के बीच स्थित हैं। इस सौर गठजोड का मुख्यालय भारत में है और इसमें  65 सदस्य देश हैं।

राहुल छाबडा ने कहा कि कोविड महामारी की वजह से हाल में भूसामरिक और भूआर्थिक  बदलावा आया है और हम रिश्तों में  बदलाव देख रहे हैं।  उन्होंने कहा कि अफ्रीका की मौजूदा आबादी एक अरब है जो 2050 तक दो अरब तक पहुंच जाएगी। अफ्रीका तेजी से प्रगति कर रहा है औऱ वह एक बडे बाजार के तौर पर उभर रहा है। इससे लाभ  उठाने के बारे में हमें सक्रिय होना होगा।

इसके पहले पीएचडी चैम्बर के अध्यक्ष  डी के अग्रवाल ने कहा कि कोविड और  भारत चीन सीमा पर सैन्य तनाव ने चीन के इरादों को उजागर किया है।  भारत के लिये यह अवसर है कि आर्थिक कूटनीति के जरिये आत्मनिर्भर भारत का  लक्ष्य हासिल करे ।

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