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खास रिपोर्ट: भारत-चीन के रिश्ते फिर लौटे पटरी पर

चीन के राष्ट्रपति के साथ पीएम मोदी
प्रतीकात्मक फोटो

नई दिल्ली। भारत और चीन के रिश्ते अब सामान्य स्तर पर आ गए हैं और दोनों देशों के बीच राजनीतिक रिश्ते न केवल पटरी पर लौट आए हैं बल्कि इसने नई  ऊंचाई हासिल की है।





भारत औऱ चीन के रिश्तों पर यहां एक आला सरकारी सूत्र ने कहा कि दोनों देशों के शिखर नेताओं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी चिन फिंग के बीच अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों के दौरान तीन मुलाकातें हुई हैं बल्कि पिछले साल अप्रैल में चीन के वूहान शहर में हुई अनौपचारिक शिखर बैठक ने रिश्तों को नया मोड़ दिया है।

सूत्र ने कहा कि चूंकि अगले साल भारत में संसदीय चुनाव होने वाले हैं इसलिये चीन के शिखर नेता का अगला भारत दौरा चुनाव के बाद नई सरकार के गठन के बाद ही होगा। चीनी राष्ट्रपति ने खुद भारत दौरा करने की बात कही है। लेकिन इसके साथ ही चीन से कैबिनेट स्तर से  ऊंचे स्तर के तीन मंत्रियों का भारत दौरा हुआ है। चीन से हाल में रक्षा, विदेश और सार्वजनिक सुरक्षा मंत्री का भारत दौरा हुआ है। दोनों देशों के बीच रक्षा रिश्ते बहाल हो गए हैं।

सूत्र ने कहा कि भारत चीन सीमा पर शांति व स्थिरता बहाल हो गई है। सीमाओं पर दोनो देशों की सेनाओं के बीच ध्वज बैठकें होने लगी हैं। चीन ने भारत से व्यापार बढ़ाने के लिये भी कुछ ठोस कदम उठाए हैं। चीन ने भारत से बासमती और गैरबासमती चावल के आयात पर रोक हटा ली है। चीन भारत से सोयाबीन का आयात भी करेगा।

लेकिन जहां तक चीन के बेल्ट एंड रोड इनीशियेटिव (बीआऱआई) प्रोजेक्ट की बात है भारत ने साफ कहा है कि .यदि इसका मकसद क्षेत्रीय आर्थिक विकास है तो इसमें क्षेत्रीय देशों को शामिल किया जाना चाहिये। सूत्र ने कहा कि भारत इस प्रोजेक्ट का इसलिये विरोध कर रहा है कि इसमें पारदर्शिता नहीं है और इसने दूसरे देशों की सम्प्रभुता का ख्याल नहीं रखा है।

पिछले साल जब पेइचिंग में इस प्रोजेक्ट पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन हुआ था तब भी भारत विरोध करने वाला अकेला देश था। सूत्र ने कहा कि यहां तक कि अमेरिका औऱ जापान ने भी इस सम्मेलन में भाग लिया लेकिन अब भारत के विरोध के बाद दुनिया के कई देशों में प्रोजेक्ट को लेकर तेवर बदल रहे हैं।

पाकिस्तान के साथ बातचीत बहाली के बारे में सूत्र ने कहा कि यह भारत में अगली सरकार के गठन के पहले मुमकिन नहीं। करतारपुर साहिब गुरुद्वारा तक सड़क मार्ग बनाए जाने को लेकर हुई पहल को सूत्र ने सांस्कृतिक सम्पर्क कहा। सूत्र ने साफ किया कि दोनों देशों के बीच इसे राजनयिक सम्पर्कों की बहाली नहीं कह सकते।

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