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Special Report : बोईंग के पी-8-आई विमान को सस्ता कैसे बताया ? CAG ने उठाया सवाल

Boeing-P8-I
बोईंग पी-8-आई विमान (फाइल फोटो)

नई दिल्ली। भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (सीएजी) ने भारतीय नौसेना के लिये नौ साल पहले अमेरिकी बोईंग कम्पनी से 2.1 अरब डालर में आठ पी-8-आई समुद्री टोही विमान खरीदने के फैसले पर सवाल उठाए हैं। यह सौदा मनमोहन सिंह की अगुवाई वाली यूपीए सरकार के कार्यकाल में सम्पन्न हुआ था।





CAG ने अपनी ताजा रिपोर्ट में कहा है कि समुद्र टोही विमान भारतीय नौसेना को बेचने की होड़ में स्पेन की कम्पनी ईड्स-कासा-स्पेन भी थी जिसका प्रस्ताव बोईंग से सस्ता था लेकिन स्पेनी कम्पनी के प्रस्ताव को मंहगा पेश करने के इरादे से 20 सालों तक विमान की देखरेख करने के प्रस्ताव की लागत को भी शामिल कर लिया। बोईंग के प्रस्ताव में 20 साल का यह सपोर्ट पैकेज शामिल नहीं था। इसलिये बोईंग का प्रस्ताव कुछ सस्ता लगा।

सीएजी ने कहा है कि अमेरिकी बोईंग कम्पनी के साथ आठ पी-8-आई समुद्र टोही विमान खऱीदने के लिये सौदा जनवरी, 2009 में 2.137 अरब डालर की लागत से सम्पन्न हुआ था। बोईंग ने सपोर्ट पैकेज के लिये अलग से करार पेश किया था। इसलिये इसकी लागत विमान के कुल सौदे में शामिल नहीं होने से बोईंग पी-8-आई सस्ता साबित हुआ।

इसके अलावा सीएजी ने यह खुलासा भी किया है कि अमेरिकी विमान भारतीय नौसेना की सभी रणनीतिक जरूरतों को नहीं पूरा करती है। बोईंग के रेडारों की क्षमता सीमित होने की वजह से सागरीय इलाकों में कवरेज इलाका काफी कम हो गया है। इसके अलावा सीएजी ने यह भी कहा है कि सौदे के तहत टारपीडो भी हासिल किये गए लेकिन पनडुब्बी नाशक युद्ध के लिये एक अहम हथियार अब तक नहीं हासिल किया गया। इस बम के नहीं होने की वजह से बोईंग के पी-8-आई विमान की पनडुब्बी नाशक क्षमता काफी घट गई।

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