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स्पेशल रिपोर्ट: हकदार सिर्फ 5 देश, लेकिन 24 देशों की धरती पर तैनात हैं परमाणु हथियार

पाक के न्यूक्लियर वेपन

नई दिल्ली। हालांकि दुनिया में केवल पांच देश ही घोषित तौर पर अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त परमाणु हथियार रखने वाले देश हैं लेकिन दुनिया में 24 देश ऐसे हैं जिनकी धऱती पर परमाणु हथियार तैनात हैं। नीदरलैंड के परमाणु मामलों के विशेषज्ञ एलार्ड वेजमेकर ने यहां एक बैठक में यह खुलासा किया।





वैश्विक परमाणु सुरक्षा पर भारत और नीदरैंड के चार विशेषज्ञों द्वारा साझा तौर पर तैयार रिपोर्ट को जारी करने के मौके पर यहां नीदरलैंड के विशेषज्ञ एलार्ड वेजमेकर ने कहा कि परमाणु हथियारों के अलावा कई देशों के पास हाईली एनरिच्ड यूरेनियम भी है जिससे परमाणु हथियार बनाए जा सकते हैं। वेजमेकर ने कहा कि इस वजह से कई समस्याएं खड़ी हो सकती हैं।

गौरतलब है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पांच स्थाई सदस्य ही परमाणु हथियार रखने के हकदार हैं जब कि भारत, पाकिस्तान औऱ इजराइल अनधिकृत तौर पर परमाणु हथियार वाले देश हैं। इनके अलावा अमेरिकी अगुवाई वाले उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) के सदस्य देशो की धरती पर भी अमेरिका ने परमाणु हथियारों की तैनाती की है। इनमें अमेरिका के साथी देश दक्षिण कोरिया औऱ जापान जैसे देश भी हैं।

हाइली एनरिच्ड यूरेनियम बन सकते हैं 80 हजार परमाणु बम

एक अन्य विशेषज्ञ डा. राजारमन के मुताबिक दुनिया भर में 2000 टन हाइली एनरिच्ड यूरेनियम है जिससे 80 हजार परमाणु बम बनाए जा सकते हैं। इस वैश्विक भंडार को पूरी तरह सुरक्षा प्रदान करना होगा। इस बारे में अमेरिका और रूस के बीच पहला समझौता 1993 में हुआ था जिसमें यह तय हुआ था कि  हाइली एनरिच्ड यूरेनियम का इस्तेमाल परमाणु बिजली घरों में किया जाएगा। हाइली एनरिच्ड यूरेनियम के अलावा कई देशों के पास फिसाइल मेटीरियल का भी भंडार है जो और भी खतरनाक है।

रूस और अमेरिका के पास 12 सौ टन परमाणु हथियार सामग्री

अम्बैसडर राकेश सूद के मुताबिक परमाणु हथियार वाले देशों के पास 1385 टन परमाणु सामग्री है जिसमें से केवल 12 सौ टन सामग्री तो रूस और अमेरिका के पास ही है। राजारमन ने कहा कि परमाणु सुरक्षा के मामले में भिन्न देशों की भिन्न प्राथमिकताएं हैं। जब ब़ड़ी ताकतें साथ होती हैं तो परमाणु सुरक्षा से जुड़े मसलों का हल निकाला जाता है लेकिन जब उनके बीच तनाव होता है तब इन पर चर्चा नहीं की जाती। उन्होंने कहा कि 1995 में जब परमाणु अप्रसार संधि(एनपीटी) की समीक्षा हुई थी तब बड़ी ताकतों ने मिल कर कई कदम उठाए थे।

2010 में भी अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति बराक औबामा ने परमाणु सुरक्षा शिखर बैठक(एनएसएस) का आयोजन किया जो अब हर दो साल पर होता है। इस शिखर बैठक के दौरान परमाणु सुरक्षा के बेहतर उपायों के कई कदम घोषित किये गए।

तबाही फैलाने के लिए परमाणु हथियारों का होना जरूरी नहीं

वेजमेकर के मुताबिक अलकायदा के परमाणु हथियारों के ट्रेनिंग मैनुअल में यह कहा गया है कि परमाणु तबाही फैलाने के लिये परमाणु हथियार का ही होना जरूरी नहीं है बल्कि किसी नागरिक परमाणु केन्द्र को भी निशाना बनाया जा सकता है।

ओआरएफ की डिस्टुंगश्ड फेलो राजेश्वरी राजगोपालन ने कहा कि परमाणु सुरक्षा एक वैश्विक समस्या है और इसे केवल क्षेत्रीय संदर्भ में ही नहीं देखा जाना चाहिये। राजगोपालन ने कहा कि परमाणु सुरक्षा में लगी एजेंसियों को और मजबूत बनाए जाने की जरूरत है।

भारत जैसी घनी आबादी वाले देश के सामने बड़ी चुनौती

राजगोपालन ने कहा कि भारत एक अनुकूल पड़ोसी इलाके में नहीं है इसलिये भारत को इस नजरिये से भी ध्यान देना होता है। भारत जैसी घनी आबादी वाले देश के सामने तो और बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा कि जिन गैरसरकारी रिएक्टरों द्वारा परमाणु आतंकवाद की बात की जाती है वे वाकई में राज्य द्वारा ही प्रायोजित होते हैं।

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