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स्पेशल रिपोर्ट: कोरोना ने विमान सेवा पर्यटन को रौंदा

एयर इंडिया
फाइल फोटो

ललित मोहन बंसल, लॉस एंजेल्स से..

कोविड-19 के चलते एयर पोर्ट बंद हैं, उड़ानें रद्द हैं और सीमाएँ सील हैं। भारत और चीन सहित दुनिया भर में हवाई यात्रा एवं पर्यटन से एक खरब दो सौ अरब डालर की क्षति हो चुकी है। इस उध्योग में दस करोड़ लोग बेरोज़गार हो चुके हैं। भारत सहित दक्षिण एशिया में इस कारोबार में मात्र 6.6 % अर्थात 234 अरब डालर का सालाना धंधा है। संयुक्त राष्ट्र पर्यटन संघटन का अनुमान है कि चालू वर्ष की पहली तिमाही में 22 % की गिरावट का अनुमान है। इंटेरनेशनल एयर ट्रेवल एसोसीएशन के अनुसार यात्री विमानों को 113 अरब डालर की क्षति हो चुकी है। ‘आकस्फ़ोर्ड इकानमिक्स’ के अनुसार विश्व इकानमी में हवाई ‘यात्रा और पर्यटन उध्योग’ में 8.9 खरब डालर अर्थात 10.3% का योगदान है. इसमें निवेश 948 अरब डालर का है. इसे यों कहें कि इस धंधे में अमेरिका, यूरोप, कैरेबियन, लेटिन अमेरिका, उत्तर पूर्व एशिया, मध्य पूर्व एशिया से भी हम नीचे हैं। एक अफ़्रीकी महाद्वीप ही है, हम थोड़ा बेहतर हैं। अब उसे भी कोरोना दंश ने डस लिया है।





आँकड़े बताते हैं, एशिया दक्षिण (234 डालर अरब डालर वार्षिक कारोबार) में मूलत: भारत को अप्रैल से जून के बीच 69 हज़ार 400 करोड़ रूपए अर्थात नो करोड़ 20 लाख डालर की क्षति का अनुमान है, तीन करोड़ अस्सी लाख लोग बेरोज़गार हुए हैं। इसके विपरीत चीन को उत्तर पूर्वी एशियाई क्षेत्र ( दो खरब डालर वार्षिक कारोबार) में एक बड़े भागीदार के रूप में भारत से कई गुणा अधिक क्षति हुई है। चीन को फ़रवरी, 2020 में तीन अरब डालर की क्षति हुई। यात्री सेवाओँ में 85 % कमी आई तो कार्गो में भी 21 % कमी हुई। हालाँकि मार्च के पहले सप्ताह में 40 % घरेलू उड़ानें शुरू हो गई थीं, लेकिन अन्तर्राष्ट्रीय उड़ाने मार्च और अप्रैल तक प्रभावित रही हैं। चीन ने घरेलू उड़ानें सस्ती कर दी हैं।

भारत की चर्चा करें तो अमेरिका अथवा यूरोप या सुदूर पूर्व एशिया से पर्यटक भारत आता था, उसकी निगाहें आगरा में ‘ताजमहल’ को ढूँढती थी तो राजस्थान में राजा-रजवाड़ों के पुराने क़िलों और राजप्रासादों की ओर जाती थी। भारत की बिज़नेस कैपिटल मुंबई में दुनिया भर के कारपोरेट जगत के कारोबारी रूख करते थे, तो दिल्ली में केंद्रीय सरकार के नुमाइंदों से मिलने-जुलने वाले आते थे। ‘अतिथि देवो भव:’ गुनगुनाते हुए हम मेहमान के घर लौटने से पहले गोआ के रमणीय समुद्र तट तक ले जाना नहीं भूलते थे। नागरिक उड्डयन मंत्रालय १८ मई से अपनी सभी घरेलू उड़ानों ;एयर इंडिया के साथ इंडिगो, स्पाइस जेट, गो एयर तथा एयर एशिया आदि को विभिन्न एयर कारिडोर में कुछ शर्तों के साथ अनुमति दे रहा है। निस्सन्देह दिल्ली मुंबई व्यस्ततम एयर कारिडोर है। अन्तर्राष्ट्रीय और घरेलू हवाई उड़ानों के पुन: शुरू होने पर सितारा होटलों, इन पर आश्रित हताश-निराश एजेंट, गाइड और मज़दूरों पर कितना फ़र्क़ पड़ेगा, देखना शेष है। क़र्ज़े में डूबी एयर इंडिया तो पहले ही सांसें गिन रही है। वन्दे भारत मिशन में एयर इंडिया ने विदेशों में फँसे भारतीयों को संकट की घड़ी में, भले ही दो ग़ुना-तीन गुना विमान भाड़ा ले कर जो सेवाएँ दी हैं, मंगलकारी हैं। इसके बावजूद एयर इंडिया की जेब गरम हुई होगी, कहना मुश्किल है। यों जनवरी और फ़रवरी में 50 % और मार्च में 70 % पर्यटकों में कमी हुई है।

फ़िज़ा बदल रही है। अमेरिका में कारोबार खुल रहे हैं, यूरोप, एशिया, कैरेबियन और लेटिन अमेरिका में अगले महीने जून से अनेक देशों में एयर पोर्ट खोलने और उड़ाने फिर से गगन में ले जाने की तैयारियाँ की जा रही हैं। विश्व ट्रेवल और टूरिज़्म काउंसिल (डब्ल्यू टी टी सी) के अध्यक्ष ग्लोरिया गुईवेरा ने कहा है कि एयर पोर्ट बंद किए जाने और उड़ानें रद्द किए जाने का कोई औचित्य नहीं है। ऐसी कार्य योजनाएं बनाएं, जो त्वरित, सटीक और पारदर्शी हों। इंडस्ट्री और यात्रियों के लिए संचार माध्यम व प्रोध्योगिकी ऐसी हो, जो कोरोना क़हर के अवांछित भय तथा आर्थिक क्षति की लगाम को थाम सके। उन्होंने आशा जताई, प्रशासन तंत्र की प्रबंध पर पकड़ बनी रहे तो अगले दस महीनों में इस उध्योग में हो रही क्षति पर क़ाबू पाया जा सकता है। डब्ल्यू टी टी सी ने मार्केटिंग कैम्पेन के तहत ‘टू गेदर इन ट्रेवल’ का एक मंत्र फूँका है। अमेरिका की बड़ी एयरलाइनों में डेल्टा और युनाइटेड एयरलाइन ने सामाजिक दूरी के दिशा निर्देशों का पालन करते हुए घरेलू उड़ानों की तैयारी की है। तीन में से बीच की सीट ख़ाली रखते हुए बुकिंग प्रारंभ की हैं। शुरू में वह घाटे के लिए भी तैयार है।

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