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स्पेशल रिपोर्ट- अंततः नौसेना को तीन साल बाद मिलेगा पनडुब्बी बचाव पोत

DSRV की प्रतीकात्मक तस्वीर

नई दिल्ली। पनडु्ब्बियों के दुर्घटनाग्रस्त होने की हालत में इन पर सवार नौसैनिकों के बचाव और राहत कार्य में मदद देने वाला पोत डाइविंग सपोर्ट वेसेल (डीआईवी) अब भारत में बनेगा। ऐसे दो पोतों के निर्माण का  समझौता  हिंदुस्तान शिपयार्ड़ लिमिटेड , विशाखापतनम के साथ किया गया। इन दो पोतों के हासिल होने के बाद भारतीय नौसेना को पनडुब्बी दुर्घटना के वक्त विदेशों से मदद मांगने की जरुरत नहीं रहेगी।





ऐसे पोतों की भारतीय नौसेना की  लम्बे अर्से मांग थी। इन दोनों पोतों के भारत में  बनने से भारतीय नौसेना के  पनडुब्बी बचाव व राहत अभियानों में मदद मिलेगी। ऐसा पहला पोत 36  महीने बाद बन कर नौसेना को मिलेगा। इसके छह महीने बाद दूसरा पोत सौंपा जाएगा। ये पोत विशाखापतनम और मुम्बई नौसैनिक अड्डे पर तैनात रहेंगे ताकि संकट के वक्त इन्हें दोनों तटों पर तुरंत तैनात किया जा सके।7,650  टन विस्थापन क्षमता वाले ये पोत 118  मीटर लम्बे होंगे।

यह पोत डीप सबर्मजेंस रेस्क्यू वेसेल (डीएसआरवी) से भी लैस होंगे जिनकी मदद से  पनडुब्बी राहत व बचाव काम अधिक सक्षमता से किया जा सकेगा। ऐसे दो डीएसआरवी हासिल करने का ठेका  ब्रिटेन की जेम्स फिशर डिफेंस कम्पनी के साथ  मार्च , 2016  में ही सम्पन्न हुआ था। इनमें से पहला पोत गत 18 अप्रैल को मुम्बई नौसैनिक गोदी को सौंपा गया था। दूसरा डीएसआरवी इस साल दिसम्बर तक विशाखापतनम को सौंपा जाएगा।

हिंद महासागर में भारतीय समुद्री इलाके की चौकसी के अलावा भारतीय नौसेना डाइविंग सपोर्ट आपरेशन भी करती है। इसके जरिये समुद्री सतह के नीचे निरीक्षण , परीक्षण और बचाव किया जाता है और गोताखोर लम्बे वक्त तक समुद्र के भीतर रह सकते है।

यहां नौसैनिक अधिकारियों के मुताबिक जहां एक पनडुब्बी अहम सामरिक सम्पदा होती है यह किसी दुर्घटना का भी शिकार हो सकती है। इस दौरान   राहत व बचाव कार्य करने की क्षमता अपनी नौसेना के पास होनी चाहिये। डीएसआरवी से लैस डीएसवी की उपलब्धता हमेशा रहने से  हिद महासागर में भारतीय नौसेना संकट में फंसी पनडुब्बियों के बचाव व राहत के लिये हमेशा तैयार रहेगी।

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