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सोनाली बनर्जी ऐसे बनीं प्रथम महिला मरीन इंजीनियर

सोनाली बनर्जी

नई दिल्ली। सोनाली बनर्जी आज ही के दिन यानी 27 अगस्त, 1999 को चार साल की कड़ी लगन से पढ़ाई पूरी करने के बाद देश की पहली मरीन इंजीनियर बनीं। इस प्रकार उन्होंने अपने बचपन का सपना साकार किया। उस वक्त उनकी उम्र महज 22 साल थी।





सोनाली बचपन से ही दुनिया की सैर करना चाहती थीं। उनके इसी सपने ने उन्हें मंजिल के करीब पहुंचाया। उन्हें समंदर और जहाजों से एक अलग ही लगाव था। सोनाली ने सामाजिक बाधाओं को दरकिनार करते हुए कोलकाता के निकट तरातला में स्थित मरीन इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (MIRI) से अपना कोर्स पूरा किया।

सोनाली के लिए समंदर का यह सफर तय करना इतना आसान नहीं था। खास बात यह है कि इससे पहले कोई भी महिला इस पद पर नियुक्त नहीं हुई थी तथा इस क्षेत्र में पूरी तरह से पुरुषों का प्रभाव था। उन्होंने अपने जज्बे से इस प्रभुत्व को तोड़ा था। पाठ्क्रम के दौरान भी उनके पुरुष सहपाठी उन्हें हतोत्साहित करते थे, पर उनके अध्यापकों ने उन्हें हमेशा आगे बढ़ने की सीख दी। सोनाली को कोर्स की प्रेरणा उनके अंकल से मिली थी जो खुद भी नौसेना में थे। उन्होंने 1995 में IIT की प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण की और मरीन इंजीनियर कोर्स में दाखिला लिया।

एमआईआरआई के डायरेक्टर के अनुसार 1949 में भी एक महिला ने मरीन इंजीनियर कोर्स में दाखिला लिया था, लेकिन अज्ञात कारणों से पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी थी।

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