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अब जेलों से बहेगी संगीत की सुर-धारा, निकलेंगे सुरीले नगमें

नई दिल्ली। खूंखार कैदियों को रखने वाली जेलों से अब संगीत की सुर-धारा बहेगी। जी हां, दरअसल जेल में बंद कैदियों की एक टीम ने अपना एक बैंड बनाया है। ये पहले खुद तैयार होंगें और फिर साथी कैदियों को तैयार करेंगे। जेल से छूट जाने पर ये कलाकार गायन-वादन को आजीविका का साधन भी बना सकेंगे।





एक अखबार में प्रकाशित खबर के अनुसार जेल के इस खास बैंड की शुरुआत गुरुग्राम की जेल से हुई। इस प्रक्रिया में पहले उन कैदियों की पहचान की गई जिनकी गायन-वादन में रूचि थी। इसके लिए 100  से भी ज्यादा कैदियों का ऑडिशन लिया गया। इनमें से बीस कैदियों का चयन किया गया। बैंड में सजायाफ्ता और ट्रायल दोनों ही कैदी शामिल हैं। साथ ही बैंड में गिटार, ड्रम, माइक्रोफोन आदि सहित सभी वाद्ययंत्र शामिल हैं। जिनके लिए जेल में दो ट्रेनर्स लगाए गए हैं जो अगले कुछ माह तक बैंड के सदस्यों को ट्रेनिंग देंगे।

इसके बाद इंटर जेल प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया जाएगा। इंडिया विजन फाउंडेशन की पूनम सिंह के मुताबिक कैदियों में गायन-वादन में रूचि को देखते हुए बैंड बनाने का ख़याल आया और जेल प्रशासन से इसके लिए बात की गई।

जेल अधीक्षक जयकिशन छिल्लर के अनुसार बैंड के कई फायदे हैं। एक तो कैदियों को अच्छा माहौल मिलेगा और उनमें सकारात्मक ऊर्जा का विकास होगा। यही नहीं वे जेल से बाहर जाने पर गायन-वादन को रोजगार का साधन भी बना सकेंगे। जल्दी ही सोनीपत रोहतक गाजियाबाद डासना  व नोएडा की कासना जेल में भी बैंड का गठन किया जाएगा।

रक्षक की राय:  गुरुग्राम जेल प्रशासन कि यह अनूठी पहल है जिसमें सजायाफ्ता और ट्रायल दोनों ही कैदियों को गायन-वादन के क्षेत्र में प्रशिक्षित किया  गया है। निश्चय ही जेल  से बाहर वह इसे जीविकोपार्जन का माध्यम बना सकेंगे। देश के अन्य जेल प्रशासन को भी ऐसी ही रचनात्मक पहल वाले कार्यक्रमों को शुरू करने कि जरुरत है।

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