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भारत की चीन को दो टूक- समुद्र में नौपरिवहन की आजादी कोई नहीं छीन सकता

रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण

नई दिल्ली। रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को कहा कि भारत दक्षिण चीन सागर में स्वतंत्र नौपरिवहन की अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था का पक्षधर है और उसका मानना है कि इस व्यवस्था को कोई भी चुनौती नहीं दे सकता। दक्षिणी चीन सागर समुद्री क्षेत्र में परिवहन की एक स्वतंत्र नियम आधारित व्यवस्था है। किसी शक्ति या शक्तियों के समूह को इसमें एकतरफा बदलाव करने का अधिकार नहीं है। सीतारमण की टिप्पणी उस वक्त आई है जब चीन विवादित दक्षिण चीन सागर में लगातार अपनी सैन्य शक्ति बढ़ा रहा है।





दो दिवसीय इंडो पैसिफिक ‘रीजनल डायलॉग’ के उद्घाटन अवसर पर रक्षा मंत्री ने कहा- हम एक बहुध्रुवीय दुनिया में रहते हैं जहां हम स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि नौपरिवहन की आजादी पर मनमाने तरीके से सवालिया निशान नहीं लगाया जा सकता। उन्होंने आगे कहा कि कुछ समय पहले तक भारत को रणनीतिक कौशल वाली क्षेत्रीय शक्ति के तौर पर देखा जाता था, पर मुझे यह कहते हुए खुशी हो रही है कि हालिया वर्षों में भारत को अब वैश्विक नीतियों को प्रभावित करने वाले देश के रूप में देखा जाने लगा है।

उन्होंने कहा कि भारत वैश्विक नेता की अपनी भूमिका को गंभीरता से लेता है। अब हम क्षेत्रीय शक्ति नहीं हैं और न ही सिर्फ क्षेत्रीय नीति को प्रभावित करने वाले देश हैं। हमारे पास एक विश्वस्तरीय नेतृत्व है। रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत प्रशांत क्षेत्र बेहद महत्वपूर्ण है और भारत को वहां समुद्री डकैतियों के खिलाफ ऑपरेशन समेत बड़ी भूमिका निभानी है।

भारत अब महज मानवीय सहायता प्रदान करने तक ही सीमित नहीं रहेगा। इस अवसर पर इंडियन नेवी चीफ एडमिरल सुनील लांबा के अलावा श्रीलंका के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ एडमिरल रविंद्र सी. विजेगुणारत्ने और ब्रिटिश रक्षा मंत्रालय के स्थायी सचिव स्टीफन लवग्रोव भी मौजूद थे।

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