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शहीद विक्रमजीत की सात माह पहले हुई थी शादी, घर में गूंजने वाली है किलकारी

शहीद लांस नायक विक्रमजीत सिंह

अंबाला। जम्मू-कश्मीर के गुरेज सेक्टर में मंगलवार को आतंकियों के साथ मुठभेड़ में शहीद हुए जवानों में से तेपला गांव के सपूत लांस नायक विक्रमजीत सिंह भी हैं। 36 राष्ट्रीय राइफल्स के लांस नायक विक्रमजीत सिंह (26 वर्ष) की इसी वर्ष 15 जनवरी को शादी हुई थी। कुछ ही माह बाद घर में किलकारी गूंजने वाली है। विक्रमजीत ने पत्नी हरप्रीत कौर से सोमवार को 12 बजे बात की थी और कहा था कि डिलीवरी से पहले छुट्टी लेकर घर आ जाऊंगा।





मां औऱ पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल, पिता को है बेटे पर गर्व

मंगलवार सुबह नौ बजे विक्रमजीत सिंह के पिता बलजिंद्र सिंह के पास यूनिट से फोन आया कि आपका बेटा देश की रक्षा करते हुए शहीद हो गए। खबर सुनते ही हँसते-खेलते घर में हाहाकार मच गया। विक्रमजीत की मां कमलेश कौर और पत्नी हरप्रीत कौर का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। पिता बलजिंद्र सिंह कहते हैं उन्हें अपने बेटे की शहादत पर गर्व है पर उनकी पथराई आंखों में बेटे के जाने का दुख भी है। किसी तरह से वह अपने को संभाले हुए हैं।

शहीद विक्रमजीत सिंह

शहीद विक्रमजीत सिंह के घर श्रद्धांजलि के लिए पहुंचे गांव वाले

बचपन से ही कहता था दादा की तरह सेना में जाऊंगा

बलजिंद्र सिंह बेटे के बचपन को याद करते हुए कहते हैं, पढ़ाई के दौरान ही विक्रमजीत जिद करता था कि दादा की तरह मैं भी सेना में जाऊंगा। विक्रमजीत के दादा भी सेना में था। वह पैराकमांडो से रिटायर हुए थे। विक्रमजीत का बड़ा मोनू सिंह भी सेना में है और गुवाहाटी में तैनात है। देश सेवा इस परिवार को विरासत में मिली है।

पांच वर्ष पहले हुए सेना में भर्ती

विक्रमजीत सिंह वर्ष 2013 में सेना में भर्ती हुए थे। फिरोजपुर में उन्हें पहली पोस्टिंग मिली। करीब डेढ़ वर्ष बाद उनका तबादला जम्मू-कश्मीर में हो गया। इसी वर्ष के शुरू में 15 जनवरी को यमुनानगर जिले के पामनीपुर गांव की हरप्रीत कौर से उनकी शादी हुई थी। छुट्टियां खत्म होने के बाद 24 मार्च को वह अपनी ड्यूटी पर लौट गये। फोन पर अकसर घर और गांव का हालचाल लेते रहते थे। एक दिन पहले सोमवार को उन्होंने लगभग एक घंटे तक पत्नी हरप्रीत कौर से बात की। घर के सदस्यों का हालचाल लिया। अपनी यूनिट के बारे में भी बातें की और आने वाले दिनों की योजना पर भी बात की। डिलीवरी से पहले घर आने की बात भी कही।

दोस्त बताते हैं-विक्रमजीत सिंह बेहद बहादुर था। देश के लिए प्राण न्योछावर करके उन्होंने दिखा दिया कि देश की रक्षा उनके लिए सर्वोपरि थी। सेना में भर्ती होने का जज्बा इतना अधिक था कि छोटी सी उम्र में ही उन्होंने इसके लिए तैयारी शुरू कर दी थी।

सैनिकों का गांव है तेपला

अंबाला जिले के गांव तेपला को सैनिकों का गांव कहा जाये तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। लगभग हर घर का कोई न कोई सदस्य सेना में है। इससे पहले भी गांव के बहादुर जवान देश की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर चुके हैं। करगिल युद्ध (वर्ष 1999) के दौरान 30 वर्षीय मेजर गुरप्रीत सिंह ने दुश्मन से लोहा लेते हुए अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान दिया था। वर्ष 2005 में जम्मू-कश्मीर में आतंकियों का मुकाबला करते हुए हरजिंदर सिंह ने अपने प्राण न्योछावर कर दिए थे। लांस नायक विनोद सिंह चार-पांच वर्ष पहले अरुणाचल प्रदेश में चीन सीमा पर शहीद हो गए थे।

पूरा गांव हालांकि शोक में डूबो हुआ है लेकिन हरेक को विक्रमजीत सिंह की शहादत पर गर्व है। विक्रमजीत के परिजनों को सांत्वना देने के लिए लोगों का तांता लगा हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि विक्रमजीत ने देश की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए अब देश को उनके परिवार की मदद के लिए आगे आना चाहिए।

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