Featured

…और चंदा मामा की ओर चल पड़ा इसरो का चंद्रयान- 2, रचा इतिहास

चंद्रयान- 2 का सफल प्रक्षेपण

श्रीहरिकोटा। भारत ने आज इतिहास रच दिया। जैसे ही घड़ी की सुइयों ने अपह्राण 2:43 बजाये, भारत ने अपने दूसरे महत्वाकांक्षी मिशन चंद्रयान- 2 को सबसे शक्तिशाली रॉकेट जीएसएलवी मार्क- 3 एम- 1 प्रक्षेपित किया।





चंद्रयान- 2 का प्रक्षेपण आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से किया गया। इस मिशन की लागत 978 करोड़ रुपये है। एक सप्ताह पहले तकनीकी गड़बड़ी आने के बाद चंद्रयान- 2 का प्रक्षेपण रोक दिया गया था। इसरो के वैज्ञानिकों ने 15 जुलाई को मिशन के प्रक्षेपण से 56 मिनट, 24 सेकेंड पहले रात 1:55 बजे रोक दिया था।

इससे 11 साल पहले इसरो ने अपने पहले सफल चंद्र मिशन चंद्रयान- 1 का प्रक्षेपणम किया था। इस यान ने चंदा मामा के 3,400 से ज्यादा चक्कर लगाए थे और यह 29 अगस्त, 2009 तक 312 दिन तक काम करता रहा। चांद पर पानी का पता लगाने का श्रेय भारत के इसी अभियान को जाता है।

चंद्रयान- 2 के तीन हिस्से हैं-

  1. ऑर्बिटर- यह चांद की परिक्रमा करते हुए साल भर बाद विभिन्न प्रयोगों को अंजाम देगा। चांद की कक्षा में पहुंचते ही लैंडर तथा रोवर ऑर्बिटर से अलग हो जाएंगे।
  2. लैंडर- यह 07 सितंबर को चद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के नजदीक उतरेगा।
  3. रोवर- लैंडर उतरने के बाद रोवर इससे अलग हो जाएगा और चांद से जुड़े अन्य प्रयोगों को अंजाम देगा।

Comments

Most Popular

To Top