Featured

15 अगस्त विशेष: ‘वायु सेना’- और मजबूत बनानी होगी हवाई ताकत

नेट सेंट्रिक वारफेयर
नेट सेंट्रिक वारफेयर (सौजन्य- गूगल)

भविष्य का कोई भी युद्ध तीनों सेनाओं द्वारा साझा तौर पर लड़ा जाएगा। थलसेना अकेले में दुश्मन के इलाके में मार्च नहीं कर सकती है और न ही नौसेना अपने युद्धपोतों को वायुसेना के हवाई आवरण के बिना हमला अभियान पर भेज सकती है। इसलिये जब किसी देश की सैन्य ताकत का आकलन करना हो तो सम्मिलित तौर पर करना होगा। हमें यह भी देखना होगा कि भारतीय सेनाओं के संसाधन दुश्मन के मुकाबले कितने हलके या वजनी हैं।





दुश्मनों के गढ़ में टैंकों और बख्तरबंद वाहनों की ताकत

टी-90 टैंक

 

भविष्य का आधुनिक युद्ध यदि जमीनी इलाके में लड़ा जा रहा हो तो थलसेना के टैंकों और बख्तरबंद वाहनों को हवाई सुरक्षा आवरण में ही दुश्मन के इलाके में भेजा जा सकता है। यदि अपनी हवाई ताकत इतनी मजबूत है कि अपनी जमीनी सेना को समुचित हवाई सुरक्षा आवरण दे सके तो दुश्मन की थलसेना चाहे कितनी ही मजबूत हो वह हवाई ताकत से नेस्तनाबूद की जा सकती है। हवाई संसाधनों की मदद से दुश्मन के आक्रमणकारी थलसैनिकों को आगे बढ़ने से रोका जा सकता है।

Comments

Most Popular

To Top