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जंयती विशेष: ‘लिख रहा हूं मैं अंजाम जिसका कल आगाज़ आएगा, मेरे लहू का हर एक कतरा…,’ शहीद भगतसिंह द्वारा कही गईं 14 बातें

अमर शहीद भगत सिंह ने अपनी कार्यशैली से तो ये जता दिया कि वे महान क्रांतिकारी हैं। पर उनके विचार इस बात की पुष्टि करते हैं इस छोटी सी उम्र में वे एक महान विचारक थे। विचारों की सोच और हँसते-हँसते फांसी के फंदे को गले में लगाना एक अद्भुत मिसाल है। इसी वजह से वह शहीद-ए-आजम भी हैं और एक विचारक भी। आज हम आपको अवगत कराते हैं उनके कुछ ऐसे विचारों से जो आज भी प्रासंगिक है।





‘जिंदगी तो सिर्फ अपने कंधों पर जी जाती है, दूसरों के कंधे पर तो सिर्फ जनाजे उठाए जाते हैं।’

‘मनुष्य तभी कुछ करता है जब उसे अपने कार्य का उचित होना सुनिश्चित होता है, जैसा कि हम विधानसभा में बम गिराते समय थे। जो मनुष्य इस शब्द का उपयोग या दुरुपयोग करते हैं उनके लाभ के हिसाब के अनुसार इसे अलग-अलग अर्थ और व्याख्या की जाती है।’

‘..जब हमने बम गिराया तो हमारा धेय्य किसी को मारना नहीं था’

भगत सिंह का बचपन

बाएं से दूसरे अपनी मां विद्यावती कि गोद में भगतसिंह (फोटो :गूगल)

‘यदि बहरों को सुनाना है तो आवाज़ को बहुत जोरदार होना होगा। जब हमने बम गिराया तो हमारा धेय्य किसी को मारना नहीं था। हमने अंग्रेजी हुकूमत पर बम गिराया था। अंग्रेजों को भारत छोड़ना चाहिए और उसे आज़ाद करना चहिये।’

‘राख का हर एक कण मेरी गर्मी से गतिमान है। मैं एक ऐसा पागल हूं जो जेल में भी आजाद है।’

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