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फुरसत में: इस फौजी ने लिखे फिल्मों के लिए चार हजार गाने, जानें 10 खास बातें 

‘जब-जब फूल खिले’ से मिली पहचान





फिल्म जब जब फूल खिले

‘भला आदमी’ के बाद फिल्मों में छिटपुट काम मिलने का सिलसिला शुरू हो गया। इसी दौरान ‘रिपोर्टर राजू’ और ‘मिस्टर एक्स इन बॉम्बे’ सरीखी फिल्मों के लिए भी आनंद बख्शी ने गीत लिखे। ‘रिपोर्टर राजू’ वही फिल्म थी जिसमें फिरोज खान पहली बार मुख्य नायक के रूप आए। किशोर कुमार अभिनीत ‘मिस्टर एक्स इन बॉम्बे’ आनंद बख्शी के लिए खास रही क्योंकि इस फिल्म का गीत ‘मेरे महबूब कयामत होगी आज रुसवा तेरी गलियों में मोहब्बत होगी…’ खूब गुनगुनाया गया औऱ आज भी गुनगुनाया जाता है। पर, उनके नाम का डंका तो वर्ष 1965 में तब बजा जब ‘हिमालय की गोद में’ और ‘जब-जब फुल खिले’ फिल्में प्रदर्शित हुईं। मनोज कुमार औऱ माला सिन्हा अभिनीत ‘हिमालय की गोद में’ फिल्म के लिए आनंद बख्शी ने चार गीत लिखे। ‘चांद सी महबूबा हो मेरी…’, ‘कंकरिया मार के जगाया…’, सरीखे लोकप्रिय गीत आनंद बख्शी ने ही लिखे थे। इस फिल्म के शेष गीत इंदीवर और कमर जलालाबादी ने लिखे थे। इस फिल्म के संगीतकार थे कल्याणजी आनंदजी। ‘जब-जब फुल खिले’ फिल्म के सारे गीत कल्याणजी आनंदजी ने आनंद बख्शी से लिखवाए। अपने गीत-संगीत के बल पर फिल्म बॉक्स आफिस पर सुपरहिट साबित हुई। ‘ना ना करते प्यार तुम्ही से कर बैठे…’, ‘यहां मैं अजनबी हूं…’, ‘एक था गुल और एक थी बुलबुल…’ तो लोगों के सिर चढ़ कर बोले। बाकी गीत भी खूब बजे। यहां गौर करने वाली बात यह है कि कल्याणजी आनंदजी इससे पहले ‘मेहंदी लगी मेरे हाथ’ (1962), ‘मजबूर’ और ‘दुल्हा दुल्हन’ (1964) के कुछ गीत आनंद बख्शी से लिखवा चुके थे। उन्हें आनंद बख्शी पर भरोसा था। इन तीनों की ट्यूनिंग ऐसी बैठी कि आने वाले कई बरसों तक इन्होंने अनेक यादगार फिल्में एक साथ दीं।

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