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रक्षा मंत्री से छावनी परिषदों में लीज रेंट पूर्ववत रखने की मांग

रक्षा मंत्री

रानीखेत/नई दिल्ली। अखिल भारतीय छावनी परिषद उपाध्यक्ष एवं मेंबर एसोसिएशन ने देश की 62 छावनी परिषदों में लीज रेंट पूर्ववत बनाए रखने की मांग की है। अधिकारियों के मुताबिक अंग्रेजों ने छावनी बसाने के मकसद से नागरिकों को ओल्ड ग्रांट लीज और लीज पर भूमि आवंटित की थी, लेकिन वर्तमान में लीज रेंट की बढ़ोत्तरी तेजी से हो रही है। जिसकी वजह से लीज रिन्यू के लिए लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। संशोधित लीज नीति बनने तक लीज रेंट की वसूली तत्काल प्रभाव से रोकने की मांग उठाई गई है।





नई दिल्ली में केंद्रीय राज्य मंत्री ग्रामीण विकास मंत्रालय राम कृपाल यादव के माध्यम से रक्षा मंत्री को भेजे ज्ञापन में कहा गया है कि 2017 में नए एसटीआर (सर्किल रेट) के मुताबिक 65 रुपये प्रति वर्ष के स्थान पर एक लाख रुपये प्रति वर्ष के हिसाब से कैंट परिषद ने लीज नवीनीकरण के नोटिस भेज दिए, जिसके कारण लीज धारकों में भारी नाराजगी है। ज्ञापन में कहा कि इस संबंध में बीते 04 मई को दिल्ली में देश के सभी छावनी क्षेत्र संबंधित केंद्रीय मंत्री, सांसद और छावनी परिषद के उपाध्यक्षों ने अधिवेशन में सुक्षाव भी रखे थे।

एक वेबसाइट में छपी खबरों के मुताबिक ज्ञापन देने के बाद एसोसिएशन के महामंत्री मोहन नेगी ने कहा कि इसके बाद लीज रेंट में संशोधन के लिए रक्षा मंत्रालय ने आठ मई को नगर पालिका द्वारा लिए जाने वाले लीज रेंट की जानकारी कैंट परिषदों से मांगी थी। उन्होंने कहा कि लीज रेंट एकाएक बढ़ने से लोगों में हड़कंप है। जब तक लीज की संशोधित नियम नहीं बन जाता तब तक लीज रेंट की वसूली को तत्काल प्रभाव से रोकना होगा।

ज्ञापन में कहा गया है साल 2019 में बनने वाली नई लीज नीति में भी दरों को यथावत रखा जाए। जिससे भूमि संबंधी अधिकारों का लाभ लोगों को मिल सके। ज्ञापन सौंपने वालों में अध्यक्ष संजीव गुप्ता, रमाशंकर गोयल और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रंजीत कुमार आदि शामिल थे।

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