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1971 के युद्ध में हुसैनीवाला में नष्ट किया गया पुल रक्षा मंत्री ने राष्ट्र को समर्पित किया

हुसैनीवाला ब्रिज

नई दिल्ली। केन्द्रीय रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को हुसैनीवाला में सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण पुल राष्ट्र को समर्पित किया। वर्ष 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान दुश्मन की बख्तरबंद इकाइयों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए इस पुल को नष्ट कर दिया गया था।





280 फुट लंबे पुल का उद्घाटन करने के बाद सीतारमण ने कहा कि सतलज नदी पर बना यह पुल फिरोजपुर को हुसैनीवाला बैराज से जोड़ेगा। यह पुल दो दर्जन से अधिक गांवों के निवासियों के लिए एकमात्र जीवन रेखा है। उन्होंने कहा कि दुश्मन को आगे बढ़ने से रोकने के लिए 1971 में तीन और चार दिसंबर की मध्य रात्रि को पुल के चार हिस्सों को ध्वस्त कर दिया गया था।

युद्ध की समाप्ति के बाद सड़क यातायात बहाल करने के लिए सेना द्वारा Bailey पुल का निर्माण किया गया था। इस अस्थायी 280 पुल को बदलने के लिए स्थायी 82.40 मीटर पुल के निर्माण का जिम्मा वर्ष 2015 में सीमा सड़क संगठन (BRO) को सौंपा गया था।

इस अवसर पर केन्द्रीय रक्षा मंत्री ने कहा कि हुसैनीवाला शहीद-ए-आजम भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव जैसे स्वतंत्रता सेनानियों से संबंधित है जिन्होंने अपनी मातृभूमि के लिए ऐसा त्याग किया जिसे समूचा राष्ट्र कभी भूल नहीं सकता। इस मौके पर सीतारमण ने BRO औऱ सेना के कर्मचारियों के प्रयासों की भी सराहना की।

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