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CRPF के जांबाज जवानों को 96 वीरता पदक, अब तक के सर्वाधिक पदक

सीआरपीएफ

नई दिल्ली। देश की सुरक्षा में तैनात केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के जवानों की दिलेरी, बहादुरी और अदम्य साहस से हर कोई परिचित है। परिस्थितियां कैसी भी हों CRPF के जवानों ने हमेशा मुस्तैदी से अपने कर्तव्य का पालन किया है। आतंक प्रभावित जम्मू-कश्मीर हो या फिर नक्सल प्रभावित छत्तीसगढ़, CRPF के जवानों ने तमाम चुनौतियों का बहादुरी के साथ मुकाबला किया है। इस स्वतंत्रता दिवस पर मिले 96 वीरता पदक भी CRPF के जवानों के अदम्य साहस और शौर्य के बारे में बहुत कुछ कह देते हैं। देश के सबसे बड़े अर्धसैनिक बल को स्वतंत्रता दिवस पर इससे पहले इतने पदक कभी नहीं मिले।





कर्तव्य पालन के दौरान अदम्य साहस औऱ शौर्य दिखाने के लिए इस वर्ष CRPF के पांच जवानों को शौर्य चक्र से सम्मानित किया। बहादुरी दिखाने के लिए दिया जाने वाला तीसरा सबसे बड़ा पुरस्कार शौर्य चक्र उन जवानों को दिया जाता है जो कर्तव्य पालन के दौरान असाधारण साहस का प्रदर्शन करते हैं। इस वर्ष CRPF के हेड कांस्बेटबल एएस कृष्णा, कांस्टेबल के. दिनेश राजा, प्रफुल्ल कुमार, डिप्टी कमांडेट केएस चाहर, हेड कांस्टेबल डी. रवींद्र बबन को शौर्य चक्र के लिए चुना गया।

CRPF की 45वीं बटालियन के हेड कांस्टेबल एएस कृष्णा, कांस्टेबल के. दिनेश राजा और प्रफुल्ल कुमार ने असाधारण साहस का प्रदर्शन करते हुए पिछले वर्ष पांच जून को जम्मू-कश्मीर के बांदीपुरा जिले के संबल में अपने कैंप में एक फिदायीन हमले को नाकाम कर दिया था। आतंकियों के खिलाफ चले इस ऑपरेशन को CRPF जवानों ने महज 45 मिनट में पूरा कर दिया था।

CRPF की 182वीं बटालियन के डिप्टी कमांडेंट केएस चाहर और हेड कांस्टेबल डी. रवींद्र बबन ने लगभग एक वर्ष पहले 26 अगस्त को पुलवामा में जिला पुलिस लाइन कैंप पर तीन आतंकवादियों के हमले को नाकाम बना दिया था। लगभग 20 घंटे तक चली मुठभेड़ में डी. रवींद्र बबन शहीद हो गये थे। उन्हें मरणोपरांत शौर्य चक्र के लिए चुना गया। डी. रवींद्र बबन के असाधारण साहस का उल्लेख करते हुए कहा गया-खतरनाक गोलीबारी के बीच हेड कांस्टेबल बबन ने देश की खातिर अपने प्राणों का बलिदान दे दिया।

CRPF के एक अधिकारी के मुताबिक तीन लाख से ज्यादा जवानों के इस बल को इस वर्ष अब तक के सर्वाधिक पदक मिले हैं। CRPF के बाद जम्मू-कश्मीर पुलिस को सर्वाधिक 37 वीरता पदक मिले। ओडिशा पुलिस को 11, सीमा सुरक्षा बल को 10, महाराष्ट्र पुलिस को 8 और छत्तीसगढ़ पुलिस को छह वीरता पदक मिले।

 

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