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प्राचीन काल की 11 विजय पताकाएं, महाभारत काल के योद्धाओं के पास थे ऐसे ‘ध्वज’

युद्ध के दौरान विजय पताका फहराए जाने की परम्परा सदियों से चली आई है, लेकिन ये पताकाएं सिर्फ विजय पताका के रूप में ही नहीं फहराए जाते थे, बल्कि सैन्य शिविरों, रथ-यात्राओं,अभियानों युद्ध से पहले और युद्ध के दौरान मोर्चे पर भी अथवा सामाजिक व धार्मिक उत्सवों के दौरान विभिन्न झंडे अथवा ध्वजों का प्रयोग करते थे। अलग-अलग ध्वज अलग-अलग कामयाबी या क्षति के सूचक होते थे। ऐसे ही कुछ ध्वजों के बारे में हम आज आपको बता रहे हैं :





‘जय’ ध्वज

यह सबसे  हल्का तथा लाल रंग का झंडा होता था। इसी तरह विजय ध्वज की लम्बाई 6 हाथ होती थी। सफ़ेद रंग का यह ध्वज पूर्ण विजय के दौरान फहराया जाता था। भीम ध्वज के बारे में कहा जाता है कि सात हाथ के बराबर लम्बाई वाला यह झंडा लोमहर्षक युद्ध के अवसर पर फहराया जाता था। यह भी लाल(अरुण) रंग का होता था।इसी तरह चपल पीले रंग का यह ध्वज 8 हाथ की लम्बाई जितना होता था। युद्ध में जीत हार के बीच जब द्वंद्व चलता था तो इस ध्वज को ऊंचा रखा जाता था जो सेनापति को युद्ध की गति की सूचना देता था।

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