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युद्द के बादल क्या बरसेंगे ?

रंजीत-कुमार (वरिष्ठ पत्रकार)

रंजीत कुमार (वरिष्ठ पत्रकार)

भारत पर  मंडरा रहे युद्ध के बादल क्या बरसेंगे भी?  सवा महीना से भी अधिक हो गए हैं डोकलाम में भारत-चीन के सैनिकों द्वारा सौ मीटर की दूरी पर एक दूसरे के सामने अपने अपने तम्बुओं में रातें बिताते हुए। गत 16 जून  को जब भारतीय सेना ने चीन के जवानों को भूटान के डोकलाम भू-भाग से होकर सड़क बनाने से रोका था तब से चीन तिलमिलाया हुआ है। करीब हर रोज चीन सरकार अपने  मीडिया के जरिये भारत को तरह-तरह की धमकियां और गम्भीर नतीजों की चेतावनी दे रही  है लेकिन भारत ने ऐसा अहसास दिया है कि उसके कान पर जूं भी नहीं रेंगा है। क्या भारत उस हाथी की तरह व्यवहार कर रहा है जिसके पीछे जब कुत्ते भौंकते हैं तो वह पीछे मुड़ कर भी नहीं देखता। या यह भारत का अतिआत्मविश्वास है जो धोखा खा सकता है?





सुनहरा मौका देख कर पाकिस्तान भी भारत को धमिकयां देने से बाज नहीं आया। गत 16 जुलाई को पाकिस्तानी सेना के सैन्य संचालन महानिदेशक ने परम्परा तोड़ते हुए  सोमवार को ही भारतीय सैन्य संचालन महानिदेशक को हाट लाइन  पर फोन किया जबकि दोनों के बीच मंगलवार को ही साप्ताहिक बातचीत होती है। इस फोन वार्ता की जानकारी दोनों पक्षों ने अपने अपने मीडिया को इस तरह दी कि दुश्मन को सबक सिखाने वाली कड़ी चेतावनी दी गई है। पाकिस्तान को लग रहा है कि अगर चीन और भारत के बीच सिक्किम सीमा पर कोई सैन्य झड़प हुई तो भारत उसमें उलझ जाएगा और पाकिस्तान के लिए यही मौका है कि वह  कश्मीर में चल रहे मौजूदा हिंसक माहौल में आग लगाने के इरादे से अपनी फौज भारतीय इलाके में भेज दे। निश्चित तौर पर पाकिस्तान ऐसा अपनी जेहादी सेना के जरिए करेगा जैसा कि उसने 1999 में करगिल युद्ध के दौरान किया था। जम्मू-कश्मीर को भारत से छीनने के लिए पाकिस्तान ने हमेशा ही इसी रणनीति का इस्तेमाल किया है लेकिन उसे पराजय ही मिली है।

लेकिन पाकिस्तान को लग रहा है कि चीन अगर डोकलाम में भारतीय सैनिकों के साथ कोई झड़प करता है तो भारत पर रणनीतिक  और सामरिक दबाव इतना बढ़ जाएगा कि वह कश्मीर में जेहादी हमलों को सम्भाल नहीं पाएगा। चीन और पाकिस्तान पहले ही  भारतीय सेनाध्यक्ष जनरल बिपिन रावत के बड़े गर्व  के साथ किये गये दावों का माखौल उड़ा चुके हैं  कि भारतीय सेना एक साथ अढ़ाई मोर्चा झेलने को तैयार है। पाकिस्तान को लग रहा है कि चीन यदि भारत के साथ मोर्चा खोलता है तो उसे भी भारत के साथ आतंकवादी सेना से हमले करवा कर आधा मोर्चा खोल देना चाहिए।  चीन भले ही सिक्किम सीमा पर अपना मोर्चा दीर्घकालीन सामरिक लाभ हानि सोचकर ही खोलेगा लेकिन पाकिस्तानी सेना की सनकी मानसिकता पर कभी भरोसा नहीं किया जा सकता। सामरिक हलकों में आकलन यही है कि चीनी मीडिया जिस तरह भारत पर भौंक रहा है वह भारत को केवल डराने के लिये ही है और वह भारत को डराने के इरादे से भारत के खिलाफ मनोवैज्ञानिक दबाव ही डालने की रणनीति पर काम कर रहा है लेकिन पाकिस्तान के भीतर जो मौजूदा अस्थिर माहौल है उसका लाभ उठाकर पाकिस्तानी सेना कोई दुस्साहस करने के इरादे से जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण  रेखा पर भारत को उकसाने वाली कोई बड़ी सैन्य कार्रवाई कर सकती है।

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